शामली। शिवरात्रि का जलाभिषेक और भगवान आशुतोष की विशेष पूजा -अर्चना सोमवार और मंगलवार को पूरे दिन होगी। शिवरात्रि का विशेष संयोग मंगलवार दोपहर 2.49 बजे त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी में बन रहा है। पंडितों के अनुसार दिन में त्रयोदशी और रात में चतुर्दशी शिवरात्रि का श्रेष्ठ संयोग माना जाता है। इस बार यह श्रेष्ठ फलदाई संयोग मंगलवार को तीसरे पहर बन रहा है। मंगलवार को पूरे दिन और पूूरी रात चारों पहर भगवान आशुतोष की विशेष पूजा अर्चना और जलाभिषेक किया जाएगा।
सावन मास की त्रयोदशी-प्रदोष व्रत और दूसरा सोमवार बहुत महत्वपूर्ण है। सावन का दूसरा सोमवार और प्रदोष व्रत के उपलक्ष्य में भगवान आशुतोष की विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। पूरे दिन पूजा और जलाभिषेक होगा। रविवार को 1 बजकर 58 मिनट पर एकादशी समाप्त होकर द्वादशी शुरू हो गई। द्वादशी सोमवार को सुबह छह बजकर तक रहेगी। छह बजे से लेकर दोपहर 2 बजकर 49 बजे तक त्रयोदशी रहेगी। सोमवार को 2 बजकर 50 मिनट से चतुर्दशी शुरू होकर पूूरी रात रहेगी। बुधवार को चतुर्दशी दोपहर 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगी।
शामली के प्रसिद्ध पंडित कुशलानंद जोशी के मुताबिक भगवान शिव को जलाभिषेक सोमवार और मंगलवार को पूरे दिन और रात में होगा, मगर शिवरात्रि मंगलवार को होगी। दिन में त्रयोदशी और रात में चतुर्दशी से शिवरात्रि का विशेष संयोग बनता है। शिवरात्रि का मंगलवार सुबह 4 बजे से विशेष पूजा अर्चना और जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। पूूरे दिन और रात भगवान आशुतोष का जलाभिषेक और विशेष पूजा अर्चना होगी।
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शिवरात्रि का जलाभिषेक का शुभ मुर्हूत
1-प्रथम पहर मंगलवार सुबह 4 बजे से लेकर 6 बजे तक।
2- दूसरा पहर सुबह 10 बजे से लेकर 12 बजे तक।
3- तीसरा पहर दोपहर बाद-- 3 बजे से लेकर 7 बजे तक।
4- चौथा पहर रात्रि 10 बजे से लेकर 12 बजे तक।
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कैसे करें भगवान आशुतोष की विशेष पूजा-अर्चना
सुबह नित्य शौच से निवृत होकर स्नान करके भगवान आशुतोष के ज्योर्तिलिंग को दूध-गंगाजल, दही शहद, चीनी से जलाभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, फूल फल अर्पित करके। धूप- दीप प्रज्वलित करके ओम नम: शिवाय, हर हर महादेव, महामृत्युंजय मत्र का जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करके आरती करें।