श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे शांतिनाथ विधान के 17वें दिन 500 परिवारों ने की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में भगवान शांतिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के समक्ष चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान के 17वें दिन 500 परिवारों की ओर से सामूहिक पूजन किया गया। इस मौके पर जैन मुनि 108 भाव भूषण महाराज ने कहा कि शांतिनाथ विधान विश्व शांति और आत्मकल्याण का माध्यम है।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने जैन धर्म की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म अनादि और शाश्वत धर्म है। भगवान आदिनाथ ने जीवों को जीवन निर्वाह का मार्ग दिखाया, जबकि भगवान महावीर ने अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का संदेश दिया। मुनि ने बताया कि हस्तिनापुर में भगवान शांतिनाथ के अवतरण के समय तीनों लोकों में शांति का वातावरण स्थापित हुआ था। उनके प्रभाव से प्रकृति में सुख-समृद्धि आई और समस्त जीवों को कल्याण का मार्ग मिला। इसी कारण भगवान शांतिनाथ को शांति विधाता के रूप में जाना जाता है।
शांतिधारा करने का सौभाग्य तनुज कुमार जैन, राखी जैन, आर्जव जैन और खुशी जैन परिवार को मिला। इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने विधान के आयोजकों का मंगल तिलक और मुकुट पहनाकर स्वागत किया। अनुष्ठान का संचालन पं. आशीष शास्त्री और आयुष जैन शास्त्री करा रहे हैं।
सांस्कृतिक संध्या में भजनों पर थिरके
सायंकाल संगीतमय महाआरती में श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर भावविभोर होकर आराधना की। रात्रि में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत जैन भजन प्रतियोगिता हुई। सांस्कृतिक कार्यक्रम में भगवान शांतिनाथ के भजनों पर श्रद्धालु जमकर थिरके। कार्यक्रम को सफल बनाने में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों एवं समाज के गणमान्य लोगों का विशेष सहयोग रहा।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद