शामली के सामुदायिक केंद्र में रुकैया खातून को प्रसव पीड़ा होने पर लाया गया था। यहां बताया गया कि निश्चेतक ने आने से मना कर दिया, इस कारण डिलीवरी नहीं कराई जा सकती। बाद में निजी अस्पताल ले जाकर डिलीवरी कराई गई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामली में प्रसव पीड़ा से गर्भवती महिला के तीन घंटे तक तड़पने और बाद में ऑपरेशन न करने के मामले की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीएमओ से रिपोर्ट मांगी है। सीएमओ ने नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार को प्रकरण की जांच सौंपी है।
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गांव लिलौन निवासी अबुबकर अपनी पत्नी रुकैया खातून को प्रसव पीड़ा होने पर बुधवार सुबह सीएचसी शामली लेकर गया था। प्रसव पीड़ा तेज होने पर स्टाफ नर्स उसे लेबर रूम में ले गई थी, लेकिन सामान्य प्रसव न होने पर चिकित्सक ने ऑपरेशन से प्रसव होना बताया, लेकिन आरोप है कि निश्चेतक ने आने से मना कर दिया था।
इस दौरान महिला करीब तीन घंटे तक प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। इसे लेकर परिजनों में आक्रोश फैल गया था और उन्होंने हंगामा करते हुए स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आरोप लगाया था। बाद में परिजन महिला को निजी अस्पताल ले गए थे, जहां पर ऑपरेशन से महिला को बच्चा हुआ था।
सरकारी अस्पताल में महिला का प्रसव न कराने पर शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. अनिल कुमार से रिपोर्ट मांगी है। सीएमओ ने इस प्रकरण की जांच नोडल अधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार को सौंपी है। साथ ही सीएमओ ने सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार से प्रकरण में आख्या मांगी।
डॉ. दीपक कुमार ने सीएमओ को रिपोर्ट भेज दी, जिसमें महिला के आपॅरेशन के बारे में निश्चेतक डॉ. बिजेंद्र कुमार को बताया गया था, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया था, जिस कारण महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था। इस संबंध में सीएमओ ने बताया कि इस प्रकरण की जांच एसीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।