शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार की फाइल फोटो।
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उदपुर गांव के ईंट भट्ठे के पास पुलिस मुठभेड़ में चार बदमाशों को मार गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले इंस्पेक्टर सुनील और टीम के 11 सदस्यों ने बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहनी थी। जैकेट पहनी होती तो इंस्पेक्टर की जान बचाई जा सकती थी।
सोमवार देर रात मुकीम उर्फ काला गिरोह के एक लाख के इनामी अरशद सहित करनाल के संजीव, मनवीर और सोनीपत के मंजीत की एसटीएफ से मुठभेड़ हो गई थी। चारों बदमाश ढेर हो गए थे, जबकि एसटीएफ के इंस्पेक्टर सुनील कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए पहले करनाल, उसके बाद गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पर एक गोली निकाले जाने के बाद उनकी मौत हो गई थी।
मुठभेड़ के दौरान नियमों का कितना पालन किया गया, इसकी जांच विभागीय अधिकारियों ने गोपनीय तरीके से शुरू करा दी है। एसटीएफ एसपी बृजेश कुमार ने बताया कि शहीद इंस्पेक्टर समेत टीम के किसी भी सदस्य ने मुठभेड़ के समय बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहनी थी, क्योंकि अचानक ही बदमाशों की सूचना मिली थी।
अब सवाल यह उठता है कि जब एसटीएफ को पहले ही मुकीम और कग्गा गैंग के सदस्यों के आने की सूचना मिली थी तो वे पूरी तरह से बचाव के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट से लैस होकर क्यों नहीं गए। जबकि पूर्व में भी खुलासा हो चुका है कि मुकीम गैंग के पास अत्याधुनिक हथियार हैं, एके 47 तक होने की बात भी पूछताछ में आई थी।