शामली। दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन के तहत शामली बाईपास की राह आसान हो गई है। जिला प्रशासन को 96 करोड़ 21 लाख 58 हजार 398 रुपये का मुआवजा किसानों को देना होगा। बाईपास की भूमि का बैनामा कराने की अनुमति के लिए पत्र जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राजमार्ग प्राधिकरण के माध्यम से शासन को भेज दिया है। किसानों को बैनामा कराने के लिए शासन से अनुमति का इंतजार है।
दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन के तहत शामली बाईपास का प्रावधान है। बाईपास के लिए 36.6344 हेक्टेयर भूमि बलवा, सिंभालका-शामली, सेहटा आदि गांवों की प्रस्तावित है। शामली बाईपास की जद में आने वाले गांवों के किसान भूमि देने को तैयार हो गए हैं। ज्यादातर किसान भूमि देने पर सहमति दे चुके हैं।
जिला प्रशासन शामली बाईपास की जद में आने वाले किसानों अन्य ग्रामीणों की कृषि भूमि, मकान, पेड़, नलकूप, पक्का निर्माण का आंकलन तैयार करा लिया है। वन, कृषि, उद्यान विभाग द्वारा कराई आंकलन रिपोर्ट जिला प्रशासन के पास पहुंच गई है। इसके अनुसार फलदार पेड़ लागत एक लाख 48 हजार 607 रुपये, साधारण पेड़ की अनुमानित लागत पांच लाख 54 हजार 121, नलकूप की लागत दस लाख 94 हजार 710, पक्का निर्माण 55 ाख आठ हजार, किसानों की कृषि भूमि 95 करोड़ 48 लाख 52 हजार 960 रुपये मिलाकर कुल 96 करोड़ 21 लाख 58 हजार 398 रुपये है।
डीएम ओपी वर्मा ने बताया कि शामली बाईपास की जद में आने वाले किसानों की भूमि के बैनामे कराने की अनुमति के लिए उत्तर प्रदेश राजमार्ग प्राधिकरण के माध्यम से शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। शासन से बैनामे की अनुमति आने के बाद गांव स्तर के किसानों को बुलाकर बैनामे कराए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि दिल्ली यमुनोत्री फोरलेन और शामली बाईपास के निर्माण के लिए जिला प्रशासन के पास 182 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हो चुकी है। शामली बाईपास की जद में आने वाले गांव- शामली, बलवा, सिभंालका, सेहटा, बनत आदि हैं।