डीएम कार्यालय द्वारा छह दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिलाने के संबंध में इंश्योरेंस कंपनी को पत्र भेजा था, लेकिन इंश्योरेंस कंपनी द्वारा उन्हें कोई क्लेम नहीं दिया और कहा कि उनके द्वारा सूचना देरी से दी गई है, इसलिए क्लेम नहीं दिया जा सकता। परिवादी ने इस संबंध में इंश्योरेंस कंपनी को नोटिस भी भेजा, लेकिन कंपनी ने क्लेम देने से पूर्ण रूप से इनकार कर दिया। इससे परिवादी को मानसिक व आर्थिक क्षति हुई है।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता, सदस्य अभिनव अग्रवाल और अमरजीत कौर ने परिवाद पर सुनवाई के बाद जारी आदेश में कहा कि परिवादी अपने वाद को सिद्ध करने में सफल रहा।
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी को बीमा पॉलिसी में वर्णित बीमा क्लेम की धनराशि मय नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज, बीमा क्लेम निरस्त किए जाने की तिथि से भुगतान की तिथि तक, परिवादी को हुई आर्थिक, मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार रुपये व परिवाद व्यय 10 हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए इस आयोग में जमा करें।
विपक्षी द्वारा की गई सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए विपक्षी पर 25 हजार रुपये अर्थदंड भी अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को नहीं दी जाएगी बल्कि नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। विपक्षी इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में करना सुनिश्चित करें, अन्यथा उसके विरुद्ध धारा 71 व 72, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।