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Shamli: देर से सूचना दी, कहकर टालती रही इंश्योरेंस कंपनी, कोर्ट ने ठोका 60 हजार रुपये का जुर्माना

Sat, 02 Aug 2025 07:23 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली

सार

शामली उपभोक्ता विवाद आयोग ने दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी पर ₹60 हजार जुर्माना लगाया है। अदालत ने बीमा क्लेम की धनराशि 9% ब्याज सहित देने और मानसिक क्षति के लिए 25 हजार भुगतान करने का आदेश दिया।

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बीमा कंपनियां (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शामली में न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर 60 हजार का जुर्माना लगाया है। शहर के मोहल्ला शिव विहार रेलपार निवासी शिवकुमार गोयल ने आठ दिसंबर 2020 को आयोग में विपक्षी दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बुढ़ाना रोड शामली के शाखा प्रबंधक के विरुद्ध दायर कराए गए परिवाद में कहा था कि उनकी पत्नी अनूप गोयल पॉलिसी धारक थी। उनकी पत्नी का देहांत 11 सितंबर 2017 को सड़क दुर्घटना में हो गया था। इसके बाद उन्होंने एक्सीडेंट क्लेम हेतु सभी जरूरी दस्तावेज सात नंबर 2027 को क्लेम हेतु प्रार्थना पत्र दारवा प्रपत्र के साथ डीएम शामली को प्रस्तुत किया था।
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डीएम कार्यालय द्वारा छह दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिलाने के संबंध में इंश्योरेंस कंपनी को पत्र भेजा था, लेकिन इंश्योरेंस कंपनी द्वारा उन्हें कोई क्लेम नहीं दिया और कहा कि उनके द्वारा सूचना देरी से दी गई है, इसलिए क्लेम नहीं दिया जा सकता। परिवादी ने इस संबंध में इंश्योरेंस कंपनी को नोटिस भी भेजा, लेकिन कंपनी ने क्लेम देने से पूर्ण रूप से इनकार कर दिया। इससे परिवादी को मानसिक व आर्थिक क्षति हुई है।

आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता, सदस्य अभिनव अग्रवाल और अमरजीत कौर ने परिवाद पर सुनवाई के बाद जारी आदेश में कहा कि परिवादी अपने वाद को सिद्ध करने में सफल रहा।
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विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी को बीमा पॉलिसी में वर्णित बीमा क्लेम की धनराशि मय नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज, बीमा क्लेम निरस्त किए जाने की तिथि से भुगतान की तिथि तक, परिवादी को हुई आर्थिक, मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार रुपये व परिवाद व्यय 10 हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए इस आयोग में जमा करें।

विपक्षी द्वारा की गई सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए विपक्षी पर 25 हजार रुपये अर्थदंड भी अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को नहीं दी जाएगी बल्कि नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। विपक्षी इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में करना सुनिश्चित करें, अन्यथा उसके विरुद्ध धारा 71 व 72, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
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