शामली। शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा 6 से 12 तक सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताब लागू करने के आदेश हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। विद्यालयों की सूची में एनसीईआरटी की किताबें गायब होने के साथ निजी प्रकाशकों की किताबों पर जोर दिया गया है। अभिभावकों को ये महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही है जिस कारण उनकी जेबें भी खाली हो रही है।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की ओर से सभी विद्यालयों को आदेश जारी किए गए थे कि कक्षा 6 से 12 तक में सभी पुस्तकें एनसीईआरटी की संचालित की जाए। इसके बाद भी जिले में एनसीईआरटी की किताबें संचालित नहीं हो रही है। यहां तक कि या तो विद्यालय से या फिर विद्यालय की ओर से निर्धारित दुकानों पर ही किताबें मिल रही है।
अभिभावक ज्ञानेंद्र सिंह मलिक और रंजीत का कहना है कि विद्यालय और निजी दुकानों के बीच कमीशन तय होने की वजह से किताबें बेहद महंगी है। कोर्स 4 से 10 हजार तक में मिल रहा है। इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। अभिभावक इस समस्या को लेकर अधिकारियों से शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं विद्यालय संचालक उनके बच्चों को स्कूल से न निकाल दें।
छोटी कक्षाओं का भी कोर्स महंगा
एलकेजी से कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों की किताबों पर महंगाई से अभिभावकों का बजट बिगड़ गया है। कुछ स्कूलों में कक्षा एक का कोर्स तीन हजार रुपये से अधिक का है।
जनपद के सभी स्कूल, कॉलेजों को एनसीईआरटी की किताबें ही संचालित करने के निर्देश दिए गए है, इसके बाद भी अगर किसी स्कूल, कॉलेज में संचालक प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई करा रहे हैं और कोई शिकायत मिलती हैं, निरीक्षण करते हुए कार्रवाई की जाएगी। - एश्वर्या जायसवाल, डीआईओएस