कैराना। मनरेगा के पोर्टल पर दर्ज पौधरोपण और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर सामने आया है। कहीं तो पौधे मिले ही नहीं जबकि कई जगहों पर देखभाल और सिंचाई के अभाव में अधिकांश पौधे सूख चुके हैं। ऐसे में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में घोटाले की बू भी आने लगी है।
कई गांवों में नहीं मिले पौधे
गांव झाड़खेड़ी में मनरेगा पोर्टल के अनुसार 2 अगस्त 2025 को गोगा मढ़ी, अमृत सरोवर और कब्रिस्तान परिसर में पौधरोपण कराया गया था। मौके पर गोगा मढ़ी पर एक भी पौधा नहीं मिला। अमृत सरोवर पर इक्का-दुक्का पौधे दिखाई दिए, जबकि कब्रिस्तान की भूमि पर भी पौधरोपण नहीं मिला। ग्रामीण नीरज ने बताया कि अमृत सरोवर पर पौधे लगाए गए थे, लेकिन उनकी सिंचाई और देखभाल की कोई व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप अधिकांश पौधे सूख गए।
जगनपुर गांव में 17 जुलाई 2025 को तालाब किनारे पौधरोपण दर्शाया गया है, लेकिन मौके पर दूर-दूर तक पौधे दिखाई नहीं दिए। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में पौधरोपण दिखाया गया, जबकि धरातल पर स्थिति अलग है। बुच्चाखेड़ी गांव में कब्रिस्तान के पास रहने वाले जोगीराम ने बताया कि पिछले वर्ष सैकड़ों पौधे लगाए गए थे, लेकिन पानी और संरक्षण के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो गए। कसेरवा कला में कब्रिस्तान, श्मशान घाट और तालाब किनारे पौधरोपण का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन मौके पर चुनिदा ही पौधे मौके पर थे।
पौधरोपण के साथ देखभाल की भी होती है जिम्मेदारी
मनरेगा के तहत केवल पौधे लगाने का ही नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा, सिंचाई और देखभाल का भी प्रावधान है। पर्यावरण विशेषज्ञ जितेंद्र कुमार का कहना है कि यदि पौधों की नियमित देखरेख नहीं की जाए तो पौधरोपण अभियान का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।
जिले में सामने आ चुका मनरेगा घोटाला
मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 17 अप्रैल 2026 को थानाभवन ब्लॉक के गांव काजीपुरा जसाना उर्फ मस्तगढ़ में मनरेगा कार्यों में बड़ा घोटाला सामने आया था। ग्रामीणों की शिकायत पर हुई जांच में पाया गया था कि 44 कार्यों में से 40 कार्य मौके पर हुए ही नहीं थे, जबकि उनके नाम पर करीब 35 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था। अब पौधरोपण के मामलों में भी सवाल उठने लगे हैं कि पोर्टल पर दर्ज कार्यों का वास्तविक सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
विभिन्न गांवों में पोर्टल पर पौधरोपण दर्शाने और मौके पर पौधे नहीं मिलने की जानकारी मिली है। मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
— प्रेमचंद, जिला विकास अधिकारी एवं परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास विभाग, शामली
क्या है मनरेगा (वीवीबीजीरामजी) पोर्टल?
मनरेगा का नाम बदलकर वीवीबीजीरामजी कर दिया है। इसके तहत कराए जाने वाले कार्यों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन मनरेगा पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। इसमें कार्य का नाम, स्थान, स्वीकृत धनराशि, मजदूरों की संख्या, भुगतान, पौधरोपण, तालाब खोदाई, मिट्टी भराई समेत अन्य विकास कार्यों का विवरण अपलोड किया जाता है। पोर्टल का उद्देश्य योजनाओं में पारदर्शिता लाना और आम लोगों को कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराना है। इसी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी की जाती है।