शामली। अच्छी सेहत के लिए शुद्ध और सुरक्षित पौष्टिक भोजन करना जरूरी है। दूषित और मिलावटी भोजन करने से पेट व अन्य बीमारियां बढ़ती है। इसलिए खानपान में सावधानी बरतने के साथ ही बाजार से बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदने में भी सावधानी बरतनी चाहिए। खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की तरफ से एक साल में लिए गए 168 नमूनों में 83 नमूने फेेल पाए गए।
हर साल सात जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। शरीर के स्वस्थ बनाए रखने के लिए खानपान सबसे महत्व रखता है। लेकिन वर्तमान युग में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री, दूषित भोजन और दूषित पानी पीने से पेट की बीमारियां होने का खतरा रहता है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि दूषित पानी और भोजन के कारण टॉयफाइड की बीमारी होती है। बड़ों के साथ बच्चे भी बड़ी संख्या में दूषित भोजन करने से बीमार हो रहे हैं। इसलिए बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छा और शुद्ध भोजन करना जरूरी है।
उधर, बाजार में मिलावटखोर ज्यादा मुनाफे के लालच में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री करते हैं। इसलिए लोगों को खाद्य पदार्थों की खरीदारी करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। वैसे तो मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की तरफ से समय-समय पर निरीक्षण व छापा मारकर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं थम रही है।
खाद्य एवं सुरक्षा विभाग ने से एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक जिले में निरीक्षण व छापा मारकर दूध उत्पादक खोया, पनीर, घी, मिठाई, नमकीन, नमक आदि खाद्य पदार्थों के 168 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे। इनमें 167 नमूनों की जांच रिपोर्ट आई है। जांच में 74 नमूने अधोमानक पाए गए। सात नमूने असुरक्षित और दो नमूनों में नियम उल्लंघन पाया गया।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनोज तोमर ने बताया कि सुरक्षित व शुद्ध खाद्य पदार्थों को उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर दुकानों का निरीक्षण कर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं। नमूनों को जांच के लिए भेजा जाता है। जो नमूने जांच में फेल होते हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।