शामली। प्राइवेट स्कूलों में दाखिलों का दौर चल रहा है। फीस से लेकर मनमाने प्रकाशक की किताबें लगाकर अभिभावकों की जेब तराशी जा रही है। हर स्कूल में एडमिशन और एनुअल फीस के साथ प्रतिमाह ली जाने वाली फीस का अपना मानक है। सबकुछ खुलेआम हो रहा है, मगर शिक्षा विभाग और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।
जनपद में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों की बड़ी संख्या है। हर स्कूल में फीस वसूली का अलग ही नियम चल रहा है। बेशक शासन ने एडमिशन फीस वसूल नहीं करने का आदेश जारी किया है।
इसके बावजूद स्कूलों में एडमिशन फीस वसूली जा रही है। फीस का भी कोई एक मानक नहीं है। कई स्कूलों से फीस स्ट्रक्चर के बारे में जानकारी की गई तो कक्षा एक से लेकर पांचवीं तक ही एडमिशन और एनुअल फीस अलग अलग वसूल की जा रही है। कक्षा-2 में किसी स्कूल में नया एडमिशन कराने पर 10 हजार का खर्च बताया जाता है तो किसी में 15 हजार रुपये तक वसूल किए जा रहे हैं।
प्रकाशक की किताबें तक तय
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी सिर्फ फीस वसूली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ड्रेस और किताबों की खरीद में भी बड़ा खेल हो रहा है। दाखिले के दौरान ही अभिभावकों को फीस जमा करने तथा कोर्स खरीदने के संबंधित पर्चा थमा दिया जाता है। अभिभावकों को बता दिया जाता है कि कोर्स किस दुकानदार के यहां से लाना है। कोर्स खरीदने में भी अभिभावकों को पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि कक्षा एक से पांचवीं तक का कोर्स तीन से पांच हजार रुपये में आ रहा है।
डीएम साहब, बंद कराओ इनकी मनमानी
शामली। कुछ अभिभावकों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि जिले भर के प्राइवेट स्कूलों में फीस वसूली के नाम पर मनमानी हो रही है, जिसे बंद कराया जाएं।
डीएम को ज्ञापन देकर कहा कि स्कूलों में हर साल फीस वृद्धि की जा रही है तथा अत्यधिक आर्थिक बोझ के कारण काफी अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में नहीं करा पाते हैं। उनकी मांग है कि प्राइवेट स्कूलों में फीस वसूली का मानक निर्धारित कराया जाएं। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से राजन उपाध्याय, मंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेश कुमार, सतीश तायल, विजय दत्त, दीपक कुच्छल, हिंदू युवा वाहिनी के जिला महामंत्री सुनील राजपूत, राजेंद्र कुमार, प्रदीप गोयल, सतीश कुमार और विक्की गर्ग आदि शामिल रहे।