शामली। विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा आज हो जाएगी। एग्जिट पोल के दावों ने प्रत्याशियों के दिलों की धड़कन और भी बढ़ा दी हैं।
प्रदेश की हॉट सीट में शामिल थानाभवन पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस सीट पर प्रदेश गन्ना मंत्री सुरेश राणा लगातार तीसरी बार जीतकर हैट्रिक लगाने के लिए चुनावी मैदान में उतरे हैं। उनके सामने गठबंधन प्रत्याशी अशरफ अली खान हैं। चीनी के कटोरे के नाम से चर्चित इस इलाके में गन्ना मंत्री सुरेश राणा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल उभरकर सामने आ रहा है कि क्या सुरेश राणा इस चुनाव में जीत की हैट्रिक लगा पाएंगे।
सपा-रालोद गठबंधन उनके विजय रथ को रोकने में कितना कामयाब हो पाते हैं यह चुनाव परिणाम आने पर ही पता लग पाएगा। यदि सुरेश राणा इस सीट पर जीत दर्ज करते हैं, तो लगातार तीन बार जीतने वाले वह पहले विधायक होंगे। इस सीट पर मुकाबला रोचक होने के साथ ही कांटे का भी हो सकता है। दरअसल, इस सीट पर मुस्लिम, सैनी, जाट और कश्यप बहुल मतदाता हैं और ये ही जीत के अगुआ बनते हैं। बसपा ने इस सीट से जहीर मलिक और कांग्रेस ने सत्य संयम सैनी को मैदान में उतारा है।
क्या पलायन का मुद्दा भाजपा को जीता पाएगा कैराना
शामली। कैराना सीट के नतीजे पर पूरे देश की निगाहें हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कैराना से पलायन का मुद्दा भाजपा के लिए संजीवनी साबित हुआ था। पार्टी ने प्रदेश में बड़ी जीत हासिल कर चुनावी पंडितों को भी चौंका दिया था, लेकिन यह सीट ही भाजपा जीत नहीं पाई थी।
इस बार भी भाजपा से मृगांका सिंह और सपा से नाहिद हसन के बीच टक्कर है। नाहिद हसन के जेल जाने के बाद उनकी छोटी बहन इकरा हसन ने चुनाव प्रचार की बागडोर संभाली थी। भाजपा ने इस बार पलायन के बाद घर वापसी को मुद्दा बनाने की कोशिश की। मुख्यमंत्री योगी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऐसे परिवारों से यहां मुलाकात भी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं ने अपने चुनावी भाषणों में इस मुद्दे को उठाया। जबकि सपा-रालोद गठबंधन ने भाईचारे का नारा दिया।
इस सीट पर 1.37 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। बृहस्पतिवार को चुनाव के नतीजे सामने आने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि पलायन का मुद्दा इस बार इस सीट पर भाजपा को जीत दिला पाएगा। कांग्रेस ने इसी सीट पर अखलाक को मैदान में उतारा है। जबकि बसपा से राजेंद्र उपाध्याय चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट के चुनाव नतीजे भी काफी रोमांचक हो सकते हैं।
----
किसान आंदोलन का शामली सीट पर कितना होगा असर
शामली। किसान आंदोलन का शामली विधानसभा सीट पर कितना असर होगा, यह देखना रोचक होगा। इस सीट पर सपा-रालोद गठबंधन और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दे रहा है।
गठबंधन से प्रसन्न चौधरी और भाजपा से तेजेंद्र निर्वाल चुनावी मैदान में हैं। जिले में सबसे ज्यादा जाट मतदाता इसी सीट पर हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी यहां काफी है। प्रमुख पांच दलों के प्रत्याशियों में से चार जाट हैं। चुनाव से पहले किसान आंदोलन के दौरान यहां की सबसे बड़ी खाप गठवाला खाप भी दोफाड़ दिखाई दी थी।
खाप चौधरी राजेंद्र सिंह जहां भाजपा के खेमे में दिखाई देते थे, वहीं थांबेदार श्याम सिंह बहावड़ी खुलकर गठबंधन के साथ रहे। जाट मतदाताओं का रुख किस ओर रहा, यह देखना भी दिलचस्प होगा। बसपा ने इस सीट पर बिजेंद्र मलिक कुड़ाना पर दांव खेला है। जबकि कांग्रेस से अय्यूब जंग चुनावी मैदान में हैं।
----
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजे
शामली सीट
तेजेंद्र निर्वाल, भाजपा-70085
पंकज मलिक, कांग्रेस-40365
बिजेंद्र मलिक, रालोद-33551
मनीष चौहान, निर्दलीय-31824
मोहम्मद इस्लाम, बसपा-17114
---
कैराना सीट
नाहिद हसन, सपा-98830
मृगांका सिंह, भाजपा-77668
अनिल चौहान, रालोद-19992
दिवाकर देशवाल, बसपा-6888
---
थानाभवन सीट
सुरेश राणा, भाजपा-90995
अब्दुल वारिस खान, बसपा-74178
जावेद राव, रालोद-31275
सुधीर पंवार, सपा-13340