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बजट में प्रावधान होने से बढ़ेगा धार्मिक पर्यटन

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कांधला का सूरज कुंड मन्दिर - फोटो : SHAMLI
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शामली। प्रदेश के बजट में धार्मिक पर्यटन के विकास के लिए प्रावधान किए जाने से जिले के तीन पर्यटन स्थलों के विकास की राह आसान हो गई है। इनके विकास के लिए 50-50 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था। जस्सूवाला मंदिर थानाभवन, कांधला कस्बे के सूरजकुंड मंदिर और कैराना विधानसभा क्षेत्र के इस्सोपुर टील के विकास के लिए जल्द बजट मिलने की उम्मीद जगी है। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी का कहना है कि धनराशि शीघ्र मिलने की उम्मीद है।
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सूरजकुंड मंदिर का होगा विकास
कांधला कस्बे के मोहल्ला रायजादगान का सूरजकुंड मंदिर मुख्यमंत्री पर्यटन विकास योजना में चयनित है। यह महाभारत कालीन है। शामली विधायक तेजेंद्र निर्वाल के प्रस्ताव पर इसके विकास का प्रस्ताव शासन को भेजा था। सूरजकुंड मंदिर की करीब 15 बीघा भूमि है। इसके विकास की पर्याप्त गुंजाइश है। मंदिर को लेकर विख्यात है कि यहां सूर्य पुत्र कर्ण अक्सर आया करते थे। यहां मां शाकंभरी देवी साक्षात विराजमान हैं। दक्षिणी मुखी प्राचीन हनुमान जी की मूर्ति भी है। हनुमान मंदिर के नीचे स्थित शिवलिंग को ऊंचा करने का प्रयास किया गया तो वहां खुदाई में करीब 300 वर्ष पुरानी ईंटें देखी गईं। मंदिर के विकास के लिए जल्द बजट जारी होने की उम्मीद है।
पौराणिक महत्व का स्थल है इस्सोपुर टील
कांधला से करीब 12 किमी दूर स्थित इस्सोपुर टील का पौराणिक महत्व है। यमुना किनारे मिट्टी के टीले हैं। माना जाता कि यहां करीब 3200 साल पहले लौह युगीन सभ्यता रही होगी। यमुना जल मार्ग से आवागमन होता था, तब यह स्थान काफी महत्वपूर्ण रहा होगा। वर्ष 2002 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रणधीर सिंह एवं शामली निवासी डॉ. उमर सैफ को चित्रित धूसर मृदभांड मिले थे। इन पर ब्राह्मी लिपि में लिखा था। यह शामली, हस्तिनापुर और कुरुक्षेत्र के बीच स्थित है।
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श्री जस्सूवाला महादेव मंदिर का भी विकास
थानाभवन कस्बे में दयाल आश्रम से कुछ दूर स्थित श्री जस्सूवाला महादेव मंदिर के विकास का भी प्रस्ताव है। इसकी करीब 52 बीघा भूमि है। इसके पास स्थित तालाब, मंदिर का सुंदरीकरण, आसपास सड़क, पानी, फुलवारी, पार्क आदि का निर्माण प्रस्तावित है। यह मंदिर महाभारत कालीन है। कहा जाता है कि यहां तीन स्वयंभू शिवलिंग धरती से निकले थे। यहां नौ दुर्गा स्थापित हैं। वर्ष 1980 में यहां संतों का समागम हुआ था। इससे मंदिर की महत्ता और बढ़ गई। धार्मिक पर्यटन के लिए बजट में प्रावधान होने से इस स्थान का भी विकास होने की उम्मीद बढ़ी है।

कांधला क्षेत्र के गांव इस्सोपुरटील का टीला- फोटो : SHAMLI

थानाभवन का जस्सूवाला माहादेव मन्दिर- फोटो : SHAMLI

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