शामली। उत्तर प्रदेश मदरसा एक्ट सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर कहा कि मदरसा एक्ट संविधान का उल्लंघन नहीं है। फैसले के बाद जिले के 46 मान्यता प्राप्त जबकि 201 गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को राहत मिलेगी। उलमाओं ने भी फैसले की सराहना की है।.
सर्वोच्च न्यायालय ने मदरसों के लिए जो फैसला दिया है हम उसका तहे दिल से स्वागत करते हैं और मदरसों की शिक्षा मानवता एवं प्रेम से भरी हुई है। पूर्वजों ने हमें जो शिक्षा दी है और मदरसे में रहकर नैतिकता का जो पाठ पढ़ा है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहतरीन फैसला किया है।
: मौलाना शौकीन, इमाम शाही जामा मस्जिद शामली
निर्णय का स्वागत है
शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार सभी को है। दीनी के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा भी मदरसों में दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है। निर्णय ने मदरसा संचालकों को राहत दी है।
: मौलाना उवैश, संचालक मदरसा खानका, थानाभवन
सभी को मिलेगा लाभ
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यूपी मदरसा एक्ट को मान्यता देकर देश हित एक बहुत अच्छा कार्य किया है। हम तहे दिल से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। इसका लाभ सभी मदरसा संचालकों को मिलेगा।
: शाही इमाम मौलाना ताहिर, जामा मस्जिद कैराना
देश में हर किसी को तालीम हासिल करने की आजादी
हिन्दुस्तान में हर मजहब, समाज व कौम को अपने मजहब की तालीम हासिल करने की आजादी दी हुई है। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए शानदार फैसला लिया।
मौलाना तैय्यब कासमी, झिंझाना
सभी में खुशी की लहर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत है। उन्होंने 700 वर्ष पुराने मजहबी तालीम के अधिकार को बरकरार रखा है। यूपी मदरसा एक्ट 2004 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा संवैधानिक रूप से मानने पर लोगों में खुशी की लहर है।
: कारी वकील, मोहतमिम मदरसा नूरिया एवं जमीयत उलमा ए हिंद के जिला कोषाध्यक्ष