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Shamli News: रिटायरमेंट के साथ रिश्ते भी हो रहे रिटायर्ड

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शामली का वन स्टॉप सेंटर। संवाद
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साठ के पार भी दिल नहीं बेकरार, बुजुर्गों में बढ़ रहा शक और तकरार
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- 60 पार के दंपतियों में भी बढ़ रही तकरार, प्रेम प्रसंग के शक और उपेक्षा बने कारण
: शामली में हर माह सामने आ रहे 7 से 9 मामले
शामली। अब तक युवाओं में देखे जाने वाले रिश्तों के तनाव, शक और मनमुटाव की स्थिति बुजुर्ग दंपतियों में भी देखने को मिल रही है। जिले में 60 से 72 वर्ष की उम्र के रिटायर्ड बुजुर्ग दंपतियों में आपसी विवाद के मामले तेजी से बढ़े हैं। हर माह औसतन 7 से 9 मामले वन स्टाॅप सेंटर में पहुंच रहे हैं, जिनमें घरेलू हिंसा, खर्च न देना और बाहरवाली से रिश्ते का शक प्रमुख कारण हैं।

हाल के प्रमुख मामले :
केस 1
सेना से रिटायर्ड पति पर अफेयर का शक
झिंझाना की 72 वर्षीय महिला ने एक जुलाई को वन स्टॉप सेंटर में शिकायत की कि उसके पति, जो हाल ही में सेना से रिटायर हुए हैं, का किसी महिला से प्रेम संबंध है। महिला ने मारपीट और घर से निकालने की धमकी का भी आरोप लगाया। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाकर सुलह कराई।
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केस 2 –
मोबाइल व्यस्तता और हिंसा का आरोप
जलालाबाद निवासी 66 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका ने बताया कि उनके पति, जो पुलिस से रिटायर हैं, दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहते हैं और उन पर हाथ उठाते हैं। बच्चे भी विरोध करते हैं तो उनके साथ मारपीट होती है। मामला अभी सुलह प्रक्रिया में है।

केस 3
खर्चा न देना, मारपीट और बेदखली
दिल्ली रोड की एक बुजुर्ग महिला ने वन स्टॉप सेंटर पर शिकायत करते हुए बताया कि उसका पति, जो पूर्व होमगार्ड था, खर्च नहीं देता बल्कि मारपीट कर घर से निकाल देता है। मामले में सुलह की कोशिश जारी है।

फैक्ट फाइल
वन स्टॉप सेंटर में हर माह कुल शिकायतें: 80
सुलह हो जाने वाले मामले: लगभग 50
रिपोर्ट दर्ज: 5–6 मामले
बुजुर्ग दंपति विवाद : 7–9 मामले प्रति माह

इन्होंने कहा...
संयुक्त परिवारों का विघटन, अकेलापन और संवाद की कमी बुजुर्ग दंपतियों के झगड़ों का प्रमुख कारण बन रहे हैं। जिन बुजुर्गों ने अपने बच्चों से अलग रहना शुरू किया है, वे छोटी-छोटी बातों में भी एक-दूसरे को समझ नहीं पाते। शक, आरोप और उपेक्षा इन रिश्तों को और कमजोर कर देती है। ऐसे समय में दंपतियों को परिवार के साथ बैठकर अपनी समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए। - गजाला त्यागी, प्रभारी, वन स्टॉप सेंटर, शामली
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यह चौंकाने वाला है कि अब 60 से 75 साल की उम्र के दंपति भी पुलिस के पास तक पहुंच रहे हैं। यह उम्र वह होती है जब जीवनसाथी एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, न कि शिकायत का कारण। शक करना आसान है, लेकिन विश्वास करना रिश्तों की असली ताकत है। बुजुर्गों को चाहिए कि वे एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और संतान को भी चाहिए कि वे अपने माता-पिता के बीच संवाद बनवाने में सहयोग करें। - डॉ. अरुण कुमार राय, मनोवैज्ञानिक
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