शामली। इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब से समुद्री मार्गों के जरिए आने वाला 13 हजार मीट्रिक टन कच्चा माल बीच रास्ते में फंस गया है, जिसका असर शामली समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पेपर उद्योग पर पड़ने लगा है। युद्ध के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से पेपर मिलों को कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो गई है।
अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब से शामली सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 30 से अधिक पेपर मिल इकाइयों के लिए कच्चा माल समुद्री मार्ग से भारत आता है। मौजूदा युद्ध के हालात में हारमुज क्षेत्र से होकर आने वाला मार्ग प्रभावित हो गया है, जिससे पेपर उद्योग को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शामली के पेपर व्यवसायी अशोक बंसल और युवा उद्यमी अभिनव बंसल ने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब से कंटेनरों के जरिए कच्चा माल ईरान के हारमुज समुद्री मार्ग से भारत आता है। युद्ध के कारण यह मार्ग बाधित होने से उनकी औद्योगिक इकाई का करीब ढाई हजार से पांच हजार मीट्रिक टन वेस्ट पेपर समुद्र में ही फंसा हुआ है। उनका कहना है कि यदि जल्द आपूर्ति नहीं हुई तो स्थानीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
पेपर मिल के स्वामी राजेश्वर बंसल ने बताया कि उनकी इकाई का करीब आठ हजार मीट्रिक टन कच्चा माल विदेश से आना था, जो अभी तक नहीं पहुंच पाया है। सामान्य स्थिति में यह माल करीब एक माह में पहुंच जाता था, लेकिन युद्ध के कारण देरी हो रही है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने और पेपर के दाम महंगे होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पहले एक डॉलर की कीमत करीब 90 रुपये थी, जो अब करीब डेढ़ रुपये तक बढ़ गई है। डॉलर महंगा होने से भी आयातित कच्चा माल और तैयार उत्पाद की कीमतों पर असर पड़ेगा।