कैराना के गांव हिंगोखेडी में श्रीराम कथा का वर्णन करते निखिल महाराज-श्रद्धालू
कैराना। गांव हिंगोखेडी चौपाल में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन आचार्य निखिल महाराज ने कहा कुछ लेना हो तो दूसरे की सहमति से और त्यागना हो या देना हो तो स्वविवेक से देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रामराज्य संयम से ही आ सकता है। भोग और वासना में डूबने से रामराज्य की कल्पना भी नहीं कर सकते। रामराज्य तो सत्ता का सर्वाेच्च आदर्श है। आदर्श को प्राप्त करने के लिए साधन भी आदर्श ही चाहिए। तुच्छ साधन से कभी उच्च लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
जीवन में कभी-कभी घोर संशय की रात भी आती है। ऐसा अवसर कभी-न-कभी हर एक के जीवन में आता है, जब कोई कठोर निर्णय लेना होता है, उसे स्वीकार करना होता है। कहा कि प्रभु श्रीराम जी सबको साथ लेकर चलने की कला में दक्ष थे। जानते थे कि लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष तो करना ही होगा। उस रात यदि राम ने निर्णय ले लिया होता कि राजगद्दी पर बैठ जाते हैं तो भारत का इतिहास कुछ और होता, लेकिन अयोध्या के राम ने उस दिन जो चिंतन किया, जो निर्णय लिया, उसने उन्हें जन-जन का राम बना दिया। इस दौरान कथा में पारस चौहान, पूरण सिंह, रामवीर प्रधान, सतीश चौहान, विकास चौहान, मदन सिंह, रोशन लाल, अजय पाल आदि शामिल रहे।