कॉमन इंट्रो : 15 जून से बरसात का मौसम शुरू मान लिया जाता है। इस बार मौसम विभाग अच्छी बारिश होने की अनुमान लगा रहा है। बरसात अच्छी हुई तो यमुना का जलस्तर भी बढ़ेगा, जिससे बाढ़ प्रभावित करीब 20 गांवों में फिर से संकट खड़ा हो सकता था। यमुना तटबंध की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसके साथ ही शामली शहर में भी नालों की सफाई का काम नहीं हुआ है। कुल मिलाकर गांवों से लेकर शहर तक में बरसात से पहले होने वाली तैयारियां अधूरी हैं।
शामली। यमुना किनारे 52.730 किमी लंबाई के तटबंध में जगह-जगह दरार और गड्ढे हैं। ड्रेनेज खंड विभाग बाढ़ आपदा प्रबंधन से दूर है। जिला प्रशासन भी कार्य योजना तैयार नहीं कर पाया है।
बरसात के दिनों में पहाड़ों पर बारिश होने के बाद ज्यादातर पानी यमुना में आता है। इससे बाढ़ की स्थिति बन जाती है। पहाड़ों पर एक जूून से 15 सितंबर तक बारिश का समय माना गया है। जिले में यमुना किनारे सहारनपुर जिले की सीमा चौसाना से शुरू होकर बिड़ौली, कैराना, सहपत, डुंडूखेडा, इस्सोपुर टील तक जिले में 52.730 किमी लंबाई के तटबंध है। पिछले दस सालों में बरसात के दिनों में यमुना में तीन लाख से लेकर छह लाख क्यूसेक पानी आ चुका है। वर्ष 2013 में बरसात के दिनों ज्यादा पानी आने से कैराना में यमुना नदी पुल के पास से लेकर हरियाणा पानीपत जिले की ओर का एक हजार मीटर तक सड़क बह जाने से हरियाणा का शामली से आवागमन कई माह तक बंद रहा था।
बाढ़ से यमुना तटबंध भी कई बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। मई माह में आंधी और बारिश के कारण यमुना नदी में पानी छोड़ा गया था, जिसमें यमुना में खड़ी फसल बह गई थी। जिला प्रशासन ने तीन दिन पूर्व बरसात और बाढ़ आपदा के मद्देनजर जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक बुलाकर बाढ़, आपदा प्रबंधन कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। एक सप्ताह में योजना तलब की थी लेकिन अभी तक कार्ययोजना तैयार नहीं हुई है।
-------------
कलरी और चौतरा गांव में हुआ कार्य
शामली। वर्ष 2015-16 में बाढ़ आ जाने से कलरी और चौतरा गांव को जिला प्रशासन ने बचाया था। डीएम जसजीत कौर ने बताया कि दो साल पहले दोनों गांवों को बचाने के लिए चार करोड़ 50 लाख की बाढ़ राहत योजना तैयार करके प्रदेश सरकार को भेजी थी। शासन से धनराशि अवमुक्त की गई थी। जिले के ड्रेनेज खंड ने दोनों तटबंध बनाने समेत दोनों गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए काम कराया है।
--------------------
यमुना तटबंध जगह-जगह हो रहा क्षतिग्रस्त
नाई नंगला जाटान के पूर्व प्रधान महीपाल का कहना है कि यमुना तटबंध जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से गड्ढे बन गए हैं। बरसात से पूर्व तटबंध की मरम्मत की आवश्यकता है। मरम्मत नही कराई गई तो बरसात में तटबंध क्षतिग्रस्त हो जाएगा। इसके अलावा कैराना क्षेत्र में भी तटबंध में जगह-जगह गड्ढे हैं।
---------------------
यमुना शामली में और ड्रेनेज खंड मुजफ्फरनगर जिले में
बसपा सरकार में 28 सितंबर 2011 में शामली जिला घोषित हो गया था। अभी जिले का ड्रेनेज खंड कार्यालय मुजफ्फरनगर से ही संचालित हो रहा है, जबकि यमुना नदी जिले में बह रही है। जिला मुख्यालय पर पूर्वी यमुना नहर खंड द्वारा ड्रेनेज खंड कार्यालय स्थापना के लिए विभाग ने शासन से धनराशि नहीं मांगी है।
------------------
यमुना नदी के किनारे तटबंध की लंबाई: 52.730 किमी
तटबंध की जद में गांव: बिड़ौली, केरटू, रामड़ा, हैदरपुर, गढ़ी मुस्लिम, भड़ी कोरियान, भड़ी मुस्तफाबाद, साल्हापुर, मंगलौरा, ख्याजपुरा, कलरी, मंडावर, इस्सोपुर खुरगान, भड़ी भरतपुर, सकोती नाईनंगला, मामौर, मोहम्मदपुर राई, मवी अहतमाल, बसेड़ा, नंगला राई, पढ़ेड, बल्हेडा, चौतरा, सहपत, चौसाना कदीम, म्यान कस्बा, उदपुर, भट्टी माजरा, शीतलगढ़ी।
कैराना में यमुना पुल में जलस्तर की क्षमता: 232.75 मीटर--
कैराना में यमुुना में बाढ़ का खतरे का निशान: 230.85 मीटर-
यमुना में बाढ चेतावनी: 230 मीटर-
यमुना में सामान्य जल स्तर- - 227.58 मीटर