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सुखों की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ जरूरी: योगेश

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शामली। आर्य समाज मंदिर के 148वें स्थापना दिवस पर तीन दिवसीय आर्य सम्मेलन का हवन यज्ञ और भजनों के साथ शुभारंभ हो गया। आर्य विद्धान योगेश भारद्वाज ने कहा कि जीवात्मा का मुख्य लक्ष्य सुख प्राप्ति है। सुखों की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ जरूरी
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शुक्रवार को आर्य सम्मेलन का शुभारंभ सुबह वैदिक यज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ के मुख्य यज्ञमान देवेंद्र देव आचार्य व उषा आर्या, पूरण चंद आर्य व शारदा आर्या, राजेंद्रपाल आर्य व सुनीतापाल आर्या, बीरबल आर्य व अंबरीश आर्य रहे। यज्ञ के ब्रह्मा आर्य समाज के पुरोहित डा. रविदत्त शर्मा रहे। इसके बाद आर्य समाज के संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, आर्य विद्या सभा की प्रधान मीरा वर्मा, प्रधान सुभाष गोयल आर्य आदि ने आर्य समाज के ध्वज का आरोहण किया।
आर्य विद्धान योगेश भारद्वाज ने प्रवचन करते हुए कहा कि जीवात्मा का मुख्य लक्ष्य सुख प्राप्ति है। सुखों की प्राप्ति के लिए पुरूषार्थ जरुरी है। सुख का मूल धर्म है और धर्म के लिए अर्थ जरूरी है। अर्थ के लिए राज्य जरुरी है। इससे पूर्व भजनोपदेशक कल्याणी आर्य ने भजन सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर रविकांत आर्य, रामकुमार गुप्ता, गिरधारी लाल नारंग, कमला आर्य, संतोष आर्या, प्रधान प्रेमलता आर्या, मंत्री पूनम आर्या, मिथलेश आर्या, दैनिक यज्ञ प्रभारी राजपाल आर्य, कौशल्या आर्य, मदनपाल मलिक, रणवीर आर्य, राजीव हटवाल, जेपी आर्य, अशोक आर्य, हरपाल सिंह, मनोज कुमार आर्य, रामेश्वर दयाल आर्य, जगन्नाथ मिश्रा, वेदप्रकाश आर्य, नीलम आर्या, अर्चना आर्या, विमला आर्या आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सुभाष धीमान ने किया।
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