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मौसम की मार से घट सकता है गेहूं और सरसों का उत्पादन

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मौसम की मार से घट सकता है गेहूं और सरसों का उत्पादन
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रोहित अग्रवाल
शामली। मौसम की बेरुखी किसानों को भारी पड़ रही है। 15 दिन में दो बार हुई बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसल पर आफत टूटी है। कृषि विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि मौसम की मार से गेहूं और सरसों का रकबा और पैदावार प्रभावित हो सकती है।
जिले में गेहूं की बुवाई नवंबर के महीने में शुरू हो जाती है। अधिकतर किसान गन्ने और धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई करते हैं। नवंबर में अधिकतर चरी के खेत खाली करने वाले किसान बुवाई करते हैं। गन्ने की देरी से कटाई करने वाले किसान नवंबर के आखिरी और दिसंबर के पहले सप्ताह में गेहूं बोते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ विकास मलिक के अनुसार जिले में करीब 60-70 फीसदी किसानों ने गेहूं बुवाई कर दी है। बहुत से किसानों ने नवंबर के आखिरी सप्ताह में गेहूं की बुवाई की तैयारी की थी, लेकिन उस समय भी बारिश और ओलावृष्टि के कारण बुवाई लेट हो गई थी। खेत सूखने और बुवाई के लिए अब फिर से तैयारी की, लेकिन फिर से बारिश के चलते बुवाई करीब एक सप्ताह पीछे हो गई है।
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- देरी से बुवाई पर होगा घाटा
एक दिसंबर के बाद गेहूं बुवाई में जितनी भी देरी होगी, उसमें 30 किग्रा प्रतिदिन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पैदावार में कमी आती है, क्योंकि दिसंबर के महीने में गेहूं के लिए अनुकूल मौसम नहीं मिलता। कम तापमान की वजह से जमाव ठीक से नहीं होता और जीवन चक्र भी मार्च अप्रैल में जाकर पूरा होगा, जब तापमान भी अधिक बढे़गा। इस वजह से पौधे की वानस्पतिक वृद्धि ढंग से नहीं हो सकेगी। गेहूं मेें बाली छोटी और दानों की संख्या कम हो जाती है। जिस कारण उत्पादन प्रभावित होता है। वर्तमान में जिले में गेहूं का रकबा 48 हजार 924 है। हालांकि जो गेहूं नवंबर में समय पर बोए गए हैं उनमें बारिश से ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
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- तेज हवा और बारिश से झड़ गया सरसों का फूल
सरसों की फसल में आया फूल तेज हवा और बरसात में झड़ गया। फूल के अंदर दो भाग होते हैं नर और मादा। इस वजह से नर भाग की क्रियाशीलता कम हो जाएगी। जिससे बाली में दानों की संख्या कम हो जाएगी और उत्पादन प्रभावित होता है। हालांकि जिले में सरसों का रकबा करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर के आसपास है। बारिश में अधिक नमी और आर्द्रता के कारण आलू और अन्य सब्जियों में फंगस लग जाता है जिस कारण फूल गिरने की प्रवृति बढ़ जाती है और उत्पादन कम हो जाता है।
बारिश के बाद ये बचाव करें किसान
- फसलों में सल्फर का प्रयोग करें। ये पौधे में रोग रोधी क्षमता पैदा करने का काम करेगा। फसल कुछ हद तक बीमारियों से बच सकेगी।
- जिन खेतों में जलभराव की स्थिति हो, वहां संभव हो तो अतिरिक्त जल को जल्द से जल्द बाहर निकाल दें।
- सब्जी वाली फसलों का अच्छा और अधिक उत्पादन प्राप्त करने को मचान विधि से खेती करें।
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