रोहित अग्रवाल
शामली। स्कूली वाहनों में सफर करने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए शासन द्वारा लागू की गई नई परिवहन बस सेवा नीति से स्कूल संचालक लामबंद होने लगे हैं। जहां एक ओर इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन ने कह दिया है कि नई नीति छात्रों की सुरक्षा के लिए बेहतर है। वहीं, दूसरी ओर इसे लागू करने में अभिभावकों की जेब पर ही आर्थिक बोझ बढे़गा। इसके अनुसार सुविधाएं देने पर बच्चे की स्कूल बस का किराया ही कम से कम दो से ढाई हजार तक हो जाएगा। स्कूलों ने इस संबंध में अभिभावकों को नोटिस जारी कर जानकारी दे दी है। एक दो स्कूलों ने तो 28 अगस्त से ट्रांसपोर्ट सुविधा बंद करने तक की बात कह दी है।
स्कूली वाहनों में सफर करने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार ने नई परिवहन नीति लागू की है। इसके अंतर्गत स्कूली वाहनों के लिए कई मानक तय कर दिए हैं। इनमें वाहनों में जीपीएस सिस्टम के अलावा सीसीटीवी, सीट बेल्ट, महिला कंडेक्टर, शिक्षक की अनिवार्यता संबंधी कई व्यवस्थाएं की हैं। इसके अलावा भी कई नियम बनाए गए हैं। इनमें से कई नियमों को प्राइवेट स्कूल अव्यवहारिक बता रहे हैं। उनका तर्क है नई नीति से स्कूली वाहनों में जो सुविधा और संसाधन देने की बात कही गई है उसे उपलब्ध कराने में काफी खर्च होगा। जिससे प्रति छात्र किराया दो से ढाई हजार रुपये बैठ जाएगा। जिले के शहरी क्षेत्र में ये वर्तमान में किराया 800 से 1200 तक है। सीबीएसई की इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन ने इस संबंध में पिछले दिनों बैठक की ओर इस संबंध में अभिभावकों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया था।
कहां से लाए सीट बेल्ट लगे वाहन
सीबीएसई के इंडीपेंडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार के अनुसार नए एक्ट में स्कूली वाहन में छात्रों को सीट बेल्ट लगाने की अनिवार्यता की गई है। ये नियम अपने आप में अव्यवहारिक हैं, क्योंकि अभी तक किसी भी कंपनी ने प्रत्येक सीट पर बेल्ट लगी बसें या अन्य वाहन नहीं बनाए हैं। यदि वाहनों में छेड़छाड़ कर ये व्यवस्था कराई जाए तो वो मानकों से छेड़छाड़ होगी।
कौन करेगा महिला कंडक्टर की सुरक्षा
एसोसिएशन का कहना है कि अधिकांश स्कूलों के वाहन लास्ट स्टॉप वाले गांव में ही वाहन खड़े करा देते हैं ताकि सुबह वहीं से ये बच्चों को लेकर चल सकें। ऐसे में यदि बस में महिला कंडक्टर रहेगी तो वह महिला बस खाली होने पर अकेली रह जाएगी और उसे अकेले वापस आना होगा। ऐसे में ये नियम भी अव्यवहारिक है।
स्कूल फीस बढ़ाने के पीछे ये दे रहे तर्क
अभी तक स्कूली वाहनों में वाहन की सीट क्षमता के डेढ़ गुना बच्चे बैठाए जाते हैं, लेकिन नए एक्ट में वाहन की क्षमता के अनुसार उतने ही बच्चेेे बैठेंगे। यानी जिस वाहन में 30 सीट होती थी उसमें 45 बच्चे बैठते थे, लेकिन अब केवल 30 ही बच्चे बैठेंगे। साफ है कि जब बच्चे कम होंगे तो डेढ़ गुना किराया भी बढ़ाना पड़ेगा। इसके अलावा वाहन में महिला कंडक्टर, एक शिक्षक की अतिरिक्त व्यवस्था पर भी खर्च होगा। मेंटीनेंस भी बढे़गा। इन सबको मिलाकर किराया दो हजार से कम नहीं होगा ।
नई परिवहन बस सेवा नीति के बिंदु
- वाहन में सीटों की क्षमता के अनुसार बच्चे बैठाने होंगे
- वाहन में एक महिला कंडक्टर का होना जरूरी
- एक शिक्षक भी बस में यात्रा करेगा
- वाहन में जीपीएस और सीसीटीवी लगवाने अनिवार्य
- चालक का प्रतिमाह सरकारी अस्पताल में परीक्षण
- प्रत्येक स्कूल में परिवहन सुरक्षा समिति का गठन
- समिति की तीन महीने में एक बैठक अनिवार्य
कोट
ये नीति वास्तव में बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहतर कदम है, लेकिन इस एक्ट के कुछ नियमों की वजह से समस्या है। देहात में जो अभिभावक 500-700 रुपये किराया देते हैं वे दो से ढाई हजार नहीं दे सकते। इसी संबंध में स्कूलों ने अभिभावकों को नोटिस भेजकर तमाम तथ्यों से अवगत कराया है, ताकि जो अभिभावक बढ़ा किराया नहीं देना चाहते तो अपने बच्चों को स्कूल लाने ले जाने की व्यवस्था कर लें। हालांकि इस संबंध में प्रशासन से वार्ता जारी है। सरकार को भी इस बारे में विचार करना चाहिए। - राजकुमार अध्यक्ष, इंडीपेंडेट स्कूल एसोसिएशन