शामली। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की दिव्यांगता अब समय से प्रमाणित होगी। नए शिक्षा सत्र से इसके लिए एनसीईआरटी ने एआई फीचर लैस प्रशस्ति 2.0 एप विकसित कराया है। इसकी सहायता से 21 प्रकार की दिव्यांगता का प्रमाणीकरण हो सकेगा। साथ ही विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की सहूलियत बढ़ेगी।
एनसीईआरटी का प्रशस्ति एप 21 प्रकार की दिव्यांगता की पहचान के लिए विकसित कराया गया है। इससे विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों का हक सामान्य विद्यार्थी नहीं ले सकेंगे। एप को विकसित करने का उद्देश्य दिव्यांग छात्रों के त्वरित प्रमाणन, समावेशन और बेहतर शैक्षिक सहयोग को बढ़ाना है।
समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक जितेंद्र सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में लगभग 600 विद्यार्थी विशिष्ट आवश्यकता वाले चिन्हित हैं। स्कूल शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर प्रशस्ति एप परिषदीय विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए अनिवार्य किया गया है। एप के माध्यम से बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता, शारीरिक गतिविधियों और संज्ञात्मक विकास से जुड़ी जानकारियों का प्रमाणन हो सकेगा। पहले दिव्यांगता की पहचान और प्रमाणन की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती थी। नए शिक्षा सत्र में इससे सहूलियत बढ़ेगी।
मोबाइल पर करना होगा डाउनलोड
स्कूल शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों और सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों तथा कक्षा अध्यापकों को यह एप अपने मोबाइल पर डाउनलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा कस्तूरबा विद्यालयों की वार्डन, कक्षा अध्यापक, स्पेशल एजूकेटर भी इस एप का उपयोग करेंगे।
विशिष्ट आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए समेकित शिक्षा व समग्र शिक्षा के सहयोग से उत्कृष्टता के प्रयास हो रहे हैं। इसमें एनसीईआरटी का प्रशस्ति 2.0 एप सहयोगी बनेगा और योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। नए शिक्षा सत्र में इसका प्रशिक्षण डायट की ओर से शिक्षकों को दिया जाएगा। - लता राठौर, बीएसए