कोरोना महामारी के इस दौर में माहौल के साथ काम धंधों के स्वरूप भी बदलने लगे हैं। लोग रोजगार के नए विकल्प तलाश रहे हैं। शहर के जिस बाजार में बर्तनों की दुकानें सजती थी, अब वहां सब्जी बिकने लगी है। लॉकडाउन में पशु व्यापार बंद हुआ तो रोटी की खातिर इसके कारोबारी फल सब्जी बेच रहे हैं। शहर में हुए इस बदलाव पर अमर उजाला ने लोगों से बात की। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट-
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लॉकडाउन
- फोटो : amar ujala
बर्तन बाजार में लग रही सब्जी की आवाज
शहर का सबसे व्यस्त रहने वाले नए बाजार में अधिकांश, जनरल स्टोर्स और बर्तनों की दुकानें हैं। लॉकडाउन के कारण यहां करीब 70 फीसदी दुकान बंद हैं। अब दो दिन से यहां सब्जी और बाजार लगने लगा है। मंडी के अंदर के कुछ दुकानदार भी यहां खुले में सब्जी बेच रहे हैं।
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...कम कमा लेंगे पर, जान तो बची रहेगी
सब्जी विक्रेता सचिन ने बताया कि पहले उनकी दुकान शहर के अंदर मंडी में थी, लेकिन वहां भीड़ अधिक होने की वजह से यहां आ गए हैं। क्यों कि भीड़ में उन्हें भी खतरा है। इसी तरह नफीस ने बताया कि मोहल्ले के अंदर सब्जी बिकती थी लेकिन भीड़ अधिक होने की वजह से ही यहां बंद दुकान के चबूतरों पर सब्जी रखकर बेचने लगे हैं दो पैसे कम कमा लेंगे पर जान तो बची रहेगी।
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पशु कारोबार बंद तो फल बेचकर कर रहे गुजर
शहर के नए बाजार में एक बंद दुकान के चबूतरे पर फल बेच रहे ताहिर ने बताया कि उनके परिवार का पशु व्यापार का काम है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से दो महीने से काम बंद है। परिवार में कई लोग हैं। रोजी रोटी के लिए अब फल बेच रहे हैं। फल लाकर बंद दुकान के चबूतरे पर रखकर सुबह सात से 12 बजे तक बेचते हैं।
ई-रिक्शा बंद तो सब्जी बेचने लगे
हजारों लोग हैं जो ई-रिक्शा किराए पर लेकर दिन भर चलाकर परिवार की लिए दो वक्त की रोटी जुटाते थे, लेकिन अब ये बंद होने से सबसे ज्यादा मार इन्हीं पर पड़ी है। कामिल, प्रवीण, हरपाल आदि कई लोग हैं जिन्होंने परिवार का पेट पालने को सब्जी बेचना शुरू कर दिया है। बताया कि उनका तो रोज कमाना खाना है साहब, करेंगे नहीं तो पेट कहां से भरेगा।