कैराना के नवाब तालाब से अवैध कब्जे हटवाती अधिशासी अधिकारी मणि अरोरा।
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कैराना। ऐतिहासिक नवाब तालाब की भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को पालिका प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कराते हुए अवैध कब्जा हटवा दिया। इसके अलावा सड़क पर गेट खोलकर कब्रिस्तान के रास्ते को अवरुद्ध करने वालों को भी चेतावनी दी गई है।
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी मणि अरोरा के नेतृत्व में पालिका की टीम नवाब तालाब पर पहुंची। इस दौरान सामुदायिक शौचालय के पास नवाब तालाब की भूमि पर भू माफियाओं ने प्लॉटिंग कर नींव भरी रखी थी। अधिशासी अधिकारी के निर्देश पर बुलडोजर से प्लॉटों की बाउंड्री को ध्वस्त कराते हुए अवैध कब्जा हटवा दिया। इसके अलावा तालाब के चारों ओर रास्ते पर कुछ मकानों के दरवाजे खुले हुए मिले। जिस कारण कब्रिस्तान का रास्ता अवरुद्ध हो रहा हैं। अधिशासी अधिकारी ने बताया कि मकान मालिकों को 2 दिन के अंदर रास्ते को पूरी तरह खोलने की चेतावनी दी गई हैं। उन्होंने कहा कि तालाब के आसपास अवैध रूप से मकान बनाने वालों का सर्वे कराकर सूची बनवाई जाएगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह हैं प्राचीन नवाब तालाब का इतिहास
बादशाह अकबर की मौत के बाद 1605 में मुगल सम्राट जहांगीर ने शासन की बागडोर संभाली थी। बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि पहले तालाब के किनारे भव्य बगीचा था। तालाब के पश्चिम में एक महल था। जो अब खंडहर में बदल गया हैं। पूर्व में दूरदराज से लोग यहां घूमने आते थे। तालाब के बीच में 22 गज का चबूतरा था। जिसे सुफ्फा-ए-महताबी कहा जाता था। सम्राट जहांगीर ने अपनी पुस्तक तुजुक ए जहांगीरी में लिखा कि उन्होंने बचपन में कुछ दिन कैराना में बिताए। सम्राट जहांगीर ने हकीम नवाब मुकर्रम खां के इलाज करने से खुश होकर उन्हें नवाब तालाब बनवाने के लिए दे दिया था। 16वीं शताब्दी में नवाब मुकर्रम खां ने नवाब तालाब का निर्माण कराया था। मुगल सम्राट जहांगीर के समय में कर्ण नगरी कैराना में 140 बीघा जमीन पर नवाब तालाब बनाया गया था, लेकिन अब इतिहास की धरोहर नवाब तालाब अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। तालाब के चारों और अवैध कब्जे और गंदगी का साम्राज्य है। तालाब का अस्तित्व बचाने के लिए शासन स्तर से सुंदरीकरण कराना जरूरी है।