शामली। जिले ने इस बार पराली प्रबंधन में वह कर दिखाया है, जिसकी हर कोई सराहना कर रहा है। कृषि विभाग की मुहिम और किसानों की सजगता के चलते अक्तूबर तक जिले में पराली जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। पिछले साल पराली जलाने पर इसी अवधि में आठ किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। शामली प्रदेश में भी नजीर बन गया है।
इस बार किसानों ने पराली जलाने के बजाय उसका सदुपयोग शुरू किया है। कोई किसान पराली की गांठें बनवाकर गोशालाओं को बेच रहा है तो कोई उद्यमी इन्हीं गांठों से बायोमास पेलेट तैयार कर बाजार में आपूर्ति कर रहा है।
कृषि उपनिदेशक प्रमोद कुमार और जिला कृषि अधिकारी प्रदीप यादव ने बताया कि जिले के 200 से अधिक गांवों में किसानों ने पराली प्रबंधन को अपनाया है। इस्सोपुर टील के किसान सुभाष चंद और वीरेंद्र सिंह, कांधला क्षेत्र के तेजपाल सिंह और राजेंद्र सिंह जैसे किसानों ने सुपर सीडर मशीन से खेतों में ही पराली का प्रबंधन किया है। वहीं वीरेंद्र कुमार किसानों से दो हजार रुपये प्रति बीघा पराली खरीदकर गोशालाओं में इसका उपयोग करा रहे हैं।
शहर के उद्यमी नरेश गिल और राकिब धान की पराली से बायोमास पेलेट तैयार कर रहे हैं, जो ईंधन के रूप में प्रयोग हो रहे हैं। कई उद्यमी पराली की गांठों से गत्ता निर्माण और ऊर्जा उत्पादन में भी योगदान दे रहे हैं। किसानों के लिए यह दोहरा लाभ है, खेत साफ और आमदनी भी।
विभाग की निरंतर निगरानी और जागरूकता
कृषि विभाग की टीमें लगातार गांव-गांव जाकर किसानों को पराली जलाने के नुकसान और विकल्पों की जानकारी दे रही हैं। जगह-जगह मुनादी कराई जा रही है, पोस्टर लग रहे हैं और किसानों को प्रोत्साहन राशि की जानकारी दी जा रही है।
कृषि उपनिदेशक प्रमोद कुमार ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल जुर्माना नहीं, बल्कि किसानों में जागरूकता पैदा करना है। शामली के किसानों ने इस मुहिम को दिल से अपनाया है।
पराली जलाने के मामलों की गिरती संख्या
वर्ष पराली जलाने के मामले
2020 : 24 मामले
2021 : 17 मामले
2022 : 6 मामले
2023 : 5 मामले
2024 : 8 मामले
2025 : 0 मामला (अब तक)
यह आंकड़े बताते हैं कि शामली में जागरूकता की फसल अब हरियाली में बदल चुकी है।
जुर्माने और सख्ती के साथ विकल्प भी
कृषि अधिकारी के अनुसार, पराली जलाने पर सैटेलाइट से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। दो एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 5000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक में 15,000 रुपये तक जुर्माना तय है।
पराली से बने खाद, खेत की बढ़े ताकत
जिलाधिकारी अरविंद चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि पराली प्रबंधन से किसानों की आय बढ़ाई जाए। किसानों को नि:शुल्क वेस्ट डी-कंपोजर कैप्सूल दिए जा रहे हैं। इससे पराली को खाद में बदलकर फसल की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।