शामली। एसपी एनपी सिंह का कहना है कि मुठभेड़ में मारा गया बदमाश रिहान बांग्लादेशी हो सकता है, इसकी जांच कराई जा रही है। वह पुलिस से बचने के लिए फर्जी आधार कार्ड बनवाकर दिल्ली एनसीआर में अलग-अलग स्थानों पर रहता था।
एसपी के अनुसार जांच में सामने आया कि रिहान के परिजन पूर्व में दिल्ली में आए थे। वहां पर कुछ समय रहने के बाद जिला बागपत के बड़ौत में आकर रहने लगे थे। इसके बाद रिहान दिल्ली एनसीआर में गाजियाबाद, हापुड़, बागपत समेत कई स्थानों पर रह रहा था। वह ठिकाने बदलता और किराये के मकान में रहता था। पहचान छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड बनवा लेता था। एसपी ने बताया कि एआईआार में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए उसे मूल पते के लिए दस्तावेज की जरूरत थी। इसके लिए वह परेशान था। परिजनों से कहता था कि वह बांग्लादेश से सही दस्तावेज मंगवाएगा। बांग्लादेश में उसका आधार कार्ड बना हुआ था या नहीं। इससे आशंका है कि वह बांग्लादेशी हो सकता है।
कबाड़ का काम करते हुए बन गया लुटेरा
एसपी का कहना है कि जांच में सामने आया कि वह पहले बड़ौत में रहकर कबाड़ का काम करता था। इसके चलते उसने राह चलते लोगों से लूट करनी शुरू कर दी। इसके बाद वह दिल्ली भाग गया। वहां पर उसने राह चलते लोगों से लूटपाट की वारदातें की। उसका फोकस ज्यादातर महिलाओं पर रहता था। वह दिल्ली एनसीआर में अकेली जाने वाली महिलाओं से चेन स्नेचिंग, कुंडल व पर्स लूटने की वारदातें करता रहा। दिल्ली में भी उसके गिरोह के सदस्यों के बारे में जानकारी की जा रही है। एसपी का कहना है कि रिहान के परिजनों को तलाश करने के लिए पुलिस की टीम पहले दिल्ली भेजी गई। वहां से हापुड़ व गाजियाबाद गई। इसके बाद पता चला कि उसका भाई नौशाद बड़ौत में रहता है। इसके बाद नौशाद को उसके भाई के रिहान के मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना भिजवाई गई।
तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था रिहान
मुठभेड़ में मारे गए रिहान के बड़े भाई नौशाद अपने दो रिश्तेदारों आरिफ व अरबाज के साथ पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचा। उसने बताया कि वह तीन भाई थे। उससे छोटा रिहान और सबसे छोटा सद्दाम है। रिहान की 2012 में अलीगढ़ निवासी आयशा से शादी हुई थी। शादी के बाद से वह गाजियाबाद के मसूरी में रहा था। उसके चार लड़के है। सबसे बड़ा लड़का करीब दस वर्ष का और सबसे छोटा लड़का डेढ़ साल का है। नौशाद ने बताया कि उसके पिता मोहम्मद आलम की 2014 में मृत्यु हो गई थी। मां नूरजहां मसूरी में रिहान के साथ रहती थी। सद्दाम भी मसूरी में अलग मकान में अपने परिवार के साथ रहता है।
भाई की बृहस्पतिवार को हुई थी रिहान से बात
नौशाद ने बताया कि वह बड़ौत में रहता है और डेंटिंग पेंटिंग का काम करता है। नौशाद के मुताबिक रिहान ने उसे बताया था कि वह दिल्ली से कंबल, बर्तन व प्लास्टिक का सामान लाता था ओर फेरी पर बेचने का काम करता है। बृहस्पतिवार दोपहर करीब ढ़ाई बजे उससे फोन पर बात हुई थी तो उसने बताया था कि वह सरधना जा रहा है। उसकी वोट कट गई है। वोट बनवाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र की जरूरत है। इसके करीब एक घंटे बाद उसका मोबाइल फोन बंद आया। इसके बाद शुक्रवार बड़ौत पुलिस ने उसे रिहान के मारे जाने की सूचना दी। नौशाद ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव को मसूरी ले जाया जाएगा।
80 दिनों में ढेर किए पांच इनामी बदमाश
18 नवंबर 2025 को कांधला क्षेत्र में पुलिस ने एक लाख रुपये के इनामी बदमाश नफीस निवासी कांधला को मुठभेड़ में मार गिराया था। पांच दिन बाद झिंझाना क्षेत्र में पुलिस ने एक लाख रुपये के इनामी बदमाश फैसल निवासी मेरठ मुठभेड़ में मारा गया था। दो दिसंबर को झिंझाना क्षेत्र में सवा लाख रुपये के का इनामी बदमाश मिथुन निवासी गांव अलाउद्दीनपुर को मुठभेड़ में ढेर किया था। आठ दिसंबर की रात को थानाभवन और बाबरी थाना पुलिस के साथ मुठभेड़ में कांधला निवासी 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश समयदीन उर्फ सामा मारा गया था। जनवरी 2025 में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मुस्तफा उर्फ कग्गा गैंग के एक लाख के इनामी अरशद समेत चार बदमाश मारे गए थे।