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आम लोग दूर ही रहना चाहते हैं ‘पलायन’ से

Thu, 23 Jun 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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कैराना में बरखंडीमहादेव मन्दिर आरती करते लोग - फोटो : अमर उजाला
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शामली में कैराना पलायन प्रकरण छेड़कर भाजपा ने बेशक इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया, लेकिन आम लोग इस मुद्दे से दूर ही रहना चाहते हैं। कैराना और कांधला के गुर्जर इस मुद्दे पर बंटे हैं, तो जाटों ने भी इससे किनारा कर लिया।  
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कैराना से भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने जब कैराना के 346 हिंदू परिवारों के पलायन का मुद्दा उछाला, तो देशभर में राजनीतिक भूचाल आ गया। इलाहाबाद में हुए भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सम्मेलन में भी कैराना पलायन प्रकरण उठा, जिसके बाद सियासी लोगों ने आरोप प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश के समस्त जिलों से पलायन संबंधी सूचना मंगाई, जिससे स्पष्ट हो गया कि भाजपा इसे प्रदेश भर में मुद्दा बनाना चाहती है। वहीं, भाजपा सांसद हुकुम सिंह अब भी अपने बयानों पर कायम हैं। प्रकरण में अब तक की गतिविधियों के बाद यह बात भी सामने आई कि पलायन प्रकरण से आमजन का खास जुड़ाव नहीं हो सका। 
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गुर्जर क्षत्रपों का अपना रुतबा 

भाजपा सांसद हुकुम सिंह गुर्जर बिरादरी से हैं। कैराना क्षेत्र के गांवों में हिंदू गुर्जरों में उनकी अच्छी छवि है, जिसके बूते कैराना क्षेत्र के हिंदू गुर्जर उन्हीं को अपना नेता मानते हैं। वहीं, कांधला क्षेत्र के गांवों के हिंदू गुर्जर सपा नेता एवं एमएलसी वीरेंद्र सिंह को अपना नेता मानते हैं। कांधला और कैराना के बीच महज 10 किलोमीटर का ही फासला है, मगर पलायन प्रकरण पर गुर्जर समाज भी एकजुट नहीं हुआ।

इस मामले वीरेंद्र सिंह इस मामले पर कहते हैं कि भाजपा सांसद ने कैराना पलायन का मामला उठाया वह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। चुनाव के नजदीक आने पर इस तरफ का मुद्दा उठाकर समाज को बांटने की कोशिश न की जाए।

कैराना(शामली)(ब्यूरो)। पलायन प्रकरण ने बेशक लोगों के दिलों में दरार पैदा करने की कोशिश की हो, मगर कैराना के बाशिंदों की मजहबी तहजीब बेमिसाल है। आजादी के बाद से कैराना कस्बा हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल रहा। यहां प्रतिदिन मंदिरों में पूजा और आरती होती है, तो मस्जिदों में अजान और नमाज। 
कैराना से पलायन प्रकरण की जांच करने आए भाजपा के दल ने कहा था कि कैराना के हालात खराब हैं। गुंडागर्दी हावी होने के साथ ही कैराना में हिंदुओं को धार्मिक आयोजन करने में भी कठिनाईयां होती हैं। भाजपा के इस दावे पर कैराना के लोग इत्तेफाक नहीं रखते, बल्कि कहते हैं कि दोनों ही समुदाय के लोग धार्मिक आयोजन हर्षोल्लास से करते आए हैं। 

मंदिरों में कीर्तन, मस्जिदों में नमाज 
कस्बे में प्राचीन देवी मंदिर श्रंखला में बाला सुंदरी, बनखंडी महादेव, मां काली, बालाजी, भैरव नाथ, शनिदेव, साई बाबा व जोडिया कुएं पर महादेव मंदिर, पट्टों वाला पर मेहतो वाला मंदिर, शंकर सौदियान में शिव मंदिर, सरावज्ञान में नव दुर्गा मंदिर, पीपलो तला में शिव मंदिर, चौक बाजार में महादेव मंदिर, गुंबद में संतोषी माता मंदिर, पट्टो वाला पर पवन धाम आदि मंदिरों में श्रद्धालु सवेरे से ही पूजा अर्चना व आरती करके धर्म लाभ उठाते हैं। वहीं दूसरी ओर कस्बे की जामा मस्जिद, बस अड्डे वाली मस्जिद, ईदगाह, दरबार वाली शाही मस्जिद, चौक बाजार स्थित मस्जिदों में कस्बे के लोग अल्लाह की बारगाह में सजदा करते हैं। 
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