शामली। जिलेभर की पांच ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के भुगतान के नाम पर लाखों के गोलमाल की आशंका है। कई मामलों में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पक्के बिल और रसीद के बजाए जीएसटी पंजीकरण पर्चा, हार्डवेयर स्टोर के कच्चे बिल और यहां तक कि कोरा कागज अपलोड कर लाखों रुपये के भुगतान निकाल लिया। इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पड़ताल में बीबीपुर जलालाबाद, मंसूरा, डोकपुरा, पेलखा और गुर्जरपुर ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और संदिग्ध भुगतान के मामले सामने आए हैं। संवाद
पेलखा में तीन लाख के कार्य में जीएसटी पर्चा अपलोड किया
पेलखा गांव में तीन लाख रुपये के विकास कार्य के स्थान पर केवल जीएसटी पंजीकरण का पर्चा अपलोड कर मात्र 2500 रुपये का विवरण दर्शाया है। इसी गांव में नाला सफाई के नाम पर 44 हजार रुपये का हार्डवेयर स्टोर का बिल ही अपलोड कर दिया गया जबकि मजदूरों के नाम और कार्य विवरण का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
मंसूरा में 3.95 लाख का भुगतान, लेकिन पोर्टल पर कोरा कागज
मंसूरा गांव में विकास कार्यों के नाम पर 3.95 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया है, लेकिन उसके बदले ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर केवल कोरा कागज और अधूरे दस्तावेज अपलोड किए गए हैं। यहां मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने के बावजूद उनके नाम रिकॉर्ड से गायब पाए गए।
डोकपुरा में बिना नाम और हस्ताक्षर के भुगतान
डोकपुरा गांव में नाला सफाई और अन्य कार्यों के लिए 40 हजार रुपये तक के भुगतान दर्शाए गए हैं, लेकिन न तो प्राप्तकर्ता का नाम दर्ज है, न ही ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर और न ही आधिकारिक मोहर मौजूद है।
गुर्जरपुर में कच्चे बिल पर 1.57 लाख का भुगतान
गुर्जरपुर गांव में 1.57 लाख रुपये की लागत से दीवार और सीसी निर्माण कार्य दर्शाया गया, लेकिन वहां भी केवल कच्चा बिल अपलोड कर भुगतान निकाल लिया।
बीबीपुर जलालाबाद में मानदेय भुगतान पर भी सवाल
बीबीपुर जलालाबाद में वाटर कूलर पर 8405 रुपये खर्च दिखाया गया, लेकिन उसका अधूरा बिल पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इसी गांव में ग्राम प्रधान बबली देवी के मानदेय के साथ एक अन्य महिला मुन्नी देवी के खाते में भी भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है।
जांच के आदेश, कार्रवाई की तैयारी
इस पूरे मामले पर डीपीआरओ संदीप अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी पर्चा, हार्डवेयर बिल, कोरा कागज और कच्चे दस्तावेजों के आधार पर किए गए भुगतान की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानिए.. क्या है ई-ग्राम स्वराज पोर्टल...
ई-ग्राम स्वराज, भारत सरकार का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए बनाया गया है। इसे पंचायती राज मंत्रालय ने शुरू किया है। ई-ग्राम स्वराज का मकसद है कि ग्राम पंचायतों के सभी काम ऑनलाइन दर्ज हों, ताकि हर नागरिक और अधिकारी उन्हें आसानी से देख सके और निगरानी रख सके।
ई ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड अधूरे बिल
ई ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड अधूरे बिल