शामली। गाजियाबाद में ऑनलाइन गेम के चक्कर में तीन सगी बहनों द्वारा जान देने की घटना ने हर किसी को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद जिले में भी अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
जिले में अब तक ऐसे छह मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें मासूमों ने ऑनलाइन गेम के दौरान ओटीपी या बैंक/क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी साझा कर दी और परिजनों के खाते से रुपये निकल गए। अभिभावक अपने बच्चों को लेकर जिला अस्पताल के मनकक्ष और मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
केस-1:
गेम की लत के कारण खाना छोड़ा
शहर के रेलवे रोड निवासी एक पिता अपने कक्षा आठ में पढ़ने वाले बेटे को लेकर मनोचिकित्सक के पास पहुंचे। पिता ने बताया कि बेटा हर समय मोबाइल गेम में डूबा रहता है। पढ़ाई तक नहीं करता। मना करने पर वह खाना तक छोड़ देता है। बच्चे की काउंसलिंग की जा रही है।
केस-2:
साइबर ठगों ने उड़ा दिए डेढ़ लाख रुपये
कैराना के कांधला रोड निवासी आजम की कक्षा पांच में पढ़ने वाली बेटी ऑनलाइन गेम के दौरान साइबर ठगों के झांसे में आ गई। ठगों ने उसे बहला-फुसलाकर पिता के क्रेडिट कार्ड की जानकारी ली और करीब डेढ़ लाख रुपये उड़ा दिए। पीड़ित ने 21 जनवरी को पुलिस से शिकायत की। पुलिस जांच में जुटी है।
केस-3:
खाते से निकले डेढ़ लाख रुपये
कैराना निवासी सादिक ने 1 फरवरी को पुलिस से शिकायत की कि कक्षा सात में पढ़ने वाला बेटा ऑनलाइन गेम खेलता था। इसी दौरान गेम के बहाने ठगों ने उससे ओटीपी पूछ लिया। बेटे ने अनजाने में ओटीपी बता दिया और कुछ ही देर में खाते से करीब डेढ़ लाख रुपये निकाल लिए गए। पुलिस जांच कर रही है।
केस-4
मोबाइल फोन छीना तो बच्चे ने 112 नंबर पर कर दी शिकायत
शहर के कैराना रोड क्षेत्र में एक पिता ने बेटे को मोबाइल फोन पर ऑनलाइन गेम खेलने से रोका तो बच्चे ने पुलिस हेल्पलाइन 112 पर कॉल कर शिकायत कर दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पिता को समझाया और बच्चे को डांटने से बचने की सलाह दी।
गेम के लिंक और विज्ञापनों से हो रही ठगी
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेम के दौरान आने वाले विज्ञापनों या लिंक पर क्लिक करने के बाद साइबर ठग बैंक/क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद खाते से रुपये निकाल लेते हैं। जिले में अब तक इस तरह के छह मामले सामने आ चुके हैं।
गुस्सा, जिद और चिड़चिड़ापन… घरों में बढ़ रहा तनाव
जिला अस्पताल के मन कक्ष प्रभारी डॉ. अतुल बंसल, मनोचिकित्सक डॉ. अरुण कुमार राय के अनुसार मोबाइल गेम की लत से बच्चे गुस्सैल हो रहे हैं। कई बच्चों में अनिद्रा की समस्या बढ़ रही है। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और छोटी-छोटी बातों पर माता-पिता से झगड़ा करने लगे हैं। हर माह ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन के दो से तीन मामले में पहुंच रहे हैं। बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें लत से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह
बच्चों को मोबाइल फोन केवल एक से डेढ़ घंटे के लिए ही दें
प्ले स्टोर पर पासवर्ड लगाकर रखें, ताकि बच्चे बिना अनुमति गेम डाउनलोड न कर सकें।
अभिभावक खुद भी बच्चों के सामने मोबाइल फोन का कम उपयोग करें।
बच्चों को खेल, संगीत, पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में व्यस्त रखें।
मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए धमकाने के बजाय प्यार से समझाएं।