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शवों की नहीं हुई पहचान: अंतिम संस्कार हुआ पर मटकी मेंं बंद अस्थियां को चार वर्ष से विसर्जन का इंतजार

Sat, 16 Sep 2023 04:07 PM IST
मेरठ ब्यूरो महबूब अली, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली

सार

इंतजार किया जा रहा है कि हो सकता है कि मरने के बाद तो कोई आए और इनका विधि विधान से विसर्जन हो जाए। चार साल में यहां पर 135 अज्ञात शवों की अस्थियों मटकियों में इंतजार कर रही हैं। आखिर क्या है इसके पीछे की वजह, जानिए।
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शामली के शामघाट में रखी गई लावारिश शवों की अस्थियां
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विस्तार
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जीते जी अपनों को उनकी याद नहीं आई। लावारिसों की तरह रेलवे स्टेशन या फिर अन्य स्थानों पर भटकते-भटकते वह मर गए या फिर कहीं अज्ञात में शव मिला ओर उसकी पहचान ही नहीं हो पाई। ऐसे लोगों के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने अस्थियां और उनके कपड़े शहर के रेलवे पार श्मशान घाट में रखवा रखे हैं।

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इंतजार किया जा रहा है कि हो सकता है कि मरने के बाद तो कोई आए और इनका विधि विधान से विसर्जन हो जाए। चार साल में यहां पर 135 अज्ञात शवों की अस्थियां रखी हुई है। पुलिस के अनुसार, जिन शवों की अस्थियां रखी गईं है, उनमें 70 से अधिक बस स्टैंड, ग्रामीण एरिया में शव मिले, 35 की सड़क हादसों में मौत और 30 की बीमारी के कारण मौत हुई।

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सड़क, फुटपाथ और रेलवे स्टेशनों पर कई जिंदगियां मांगते-मांगते, भटकते हुए खत्म हो गईं। कई नहर आदि में बहते हुए मिले तो कई हादसों में खत्म हो गए। शामली में चार साल में 158 से अधिक अज्ञात शव मिले, जिनमें से अधिकतर का पुलिस ने सामाजिक संगठनों के सहयोग से अंतिम संस्कार तो करा दिया लेकिन उनकी पहचान के लिए अस्थियों और कपड़ों को श्मशान घाट की अलमारी में रखा गया है।
 
यही नहीं पुलिस ने मरने के बाद खींचा गया उनका फोटो रजिस्टर में चस्पा करने के साथ उसके कपड़े भी सहेजकर रखवाए हैं। अपने लापता सदस्य को कोई खोजने आता है तो उन्हें यही सब दिखाया जाता है।
 

हाल ही में तीन की कपड़ों से हुई शिनाख्त
पुलिस के अनुसार विभिन्न स्थानों पर तीन शवों की हाल में पहचान की गई है। इन अज्ञात शवों की अस्थियों को श्मशान घाट में रखा गया था। कपड़ों के माध्यम से ही परिजनों ने शवों की पहचान की। एक मुजफ्फरनगर तो दूसरा ओर तीसरा हरिद्वार का रहने वाला था। बीमारी के कारण मौत हुई थी।

चूहे न काटें, इसलिए रखा जाता है पूरा ध्यान
पुलिस और सामाजिक संगठन अंतिम यात्रा सेवा ट्रस्ट से जुड़े अजय संगल ने बताया कि मृतकों के कपड़ाें को चूहे नहीं काटे, इसके लिए पूरा ध्यान रखा जाता है। श्मशान घाट की अलमारियों में कपड़ों और अस्थियों को सुरक्षित रखा गया है। जल्द ही अस्थियाें को विसर्जित भी किया जाएगा। शवों के कपड़े सुरक्षित रखे जाएंगे।
 
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प्रयास रहता है कि अज्ञात मिलने वाले शवों की पहचान सोशल मीडिया और सामाजिक संगठनों के लोगों के माध्यम से कराई जाए। जिले में सड़क हादसों में मौत और परिजनों की दुत्कार के बाद लोगों की मौत के मामले अधिक सामने आते हैं। लोगों के सहयोग से शिनाख्त का प्रयास किया जाता है। -अभिषेक, एसपी शामली
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