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बारिश के साथ पड़े ओले, चार डिग्री गिरा पारा

Sun, 08 Jan 2017 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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weather - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। सर्दी की पहली बारिश और ओलावृष्टि से मौसम में ठिठुरन बढ़ गई है। शनिवार को पूरे दिन रूक- रूककर बारिश सर्द हवाओं से जनजीवन प्रभावित रहा। दिन के अधिकतम तापमान में गिरावट            आई है। रविवार को भी इसी तरह  के मौसम का अनुमान लगाया जा रहा है। 
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पश्चिमी विक्षोभ के चलते  शुक्रवार देर रात साढ़े ग्यारह बजे बारिश शुरू हो गई। बाद में ओले भी पड़े। मौसम बदलते ही दिन के तापमान में चार डिग्री
सेल्सियस गिरावट आई। शुक्रवार को जहां अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं बारिश और ओलों से शनिवार को अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। खराब मौसम में बच्चो को स्कूल जाना पड़ा। 

छुट्टी के बाद बूंदाबांदी के दौरान छात्र-छात्राएं परेशान रहे। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार रविवार को भी आकाश मे बादल छाए रहेंगे। बूंदाबांदी चलती रहेगी। दोपहर के बाद मौसम मे थोड़ा  सुधार आने की संभावना है। पूर्वी यमुना नहर खंड के जिलेदार अंबुज कुमार के अनुसार शामली में मध्य रात्रि से शुरू हुई आठ एमएम  बारिश रिकार्ड दर्ज की गई है। उधर मुजफ्फरनगर गन्ना शोधशाला के अनुसार मुजफ्फरनगर मे 9.6 एमएम रिकार्ड दर्ज की गई है।
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बघरा कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डाक्टर पीके सिंह, सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि विश्व विद्यालय मृदा विभाग के अध्यक्ष डाक्टर अशोक कुमार अहलुवालिया ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते  मौसम में बदलाव आया है।  

उधर, बदले मौसम से अधिकांश किसान खुश हैं। उनका कहना है कि बारिश से फसलों को काफी लाभ होगा। अगेती सरसों की फसल के फूलों पर ओला गिरने थोड़ा नुकसान जरूर हुआ है। उप कृषि निदेशक एवं जिला कृषि अधिकारी आनंद त्रिपाठी ने बताया कि ओलाव़ृष्टि और बारिश से सभी गेहूं, सरसों अन्य फसलों को लाभ पहुंचा है। 

बारिश से कहीं खिले चेहरे तो कहीं मुरझाए 
ऊन। सर्दी की पहली बारिश से जहां एक ओर कुछ किसानों के चेहरों पर खुशी है। वहीं, सब्जी की फसल उगाने वाले कुछ किसानों को मायूस दिख रहे हैं।शुक्रवार देर रात से ऊन क्षेत्र में रुक रुककर वर्षा हो रही है। जिस कारण ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। बारिश के साथ-साथ क्षेत्र में कई जगह पर ओले भी गिरे।

क्षेत्र में धान की फसल की कटाई करने के बाद क्षेत्र के जिन किसानों ने गेहूं की बुवाई कर ली थी, उसके लिए यह बारिश वरदान मानी जा रही है। वहीं गन्ना मिल समय पर ना चलने के कारण जिनकी समय पर गेहूं की बुवाई नहीं हो पाई और बाद में किसानों ने गन्ना निकाल कर अपने खाली खेतों में  गेहूं की बुवाई की योजना बनाई थी उनको काफी नुकसान हुआ है। आलू की फसल की बुवाई नवंबर माह में की जाती और जनवरी के अंत में इस फसल की खुदाई की जाती है।

कुछ किसान आलू की खुदाई करने के बाद खाली खेत में गेहूं की बुवाई करते है, लेकिन अब उन किसानों को खाली हाथ रहना पडे़गा। इस वर्षा का सबसे ज्यादा नुकसान आलू की फसल में है। कुछ किसानों ने आलू की खुदाई कर गेहूं की बुवाई कर डाली, लेकिन ज्यादातर फसल अब भी खेतों में ही है। वर्षा होने के कारण आलू के खेत पानी से लबालब पानी भरने कारण आलू जमीन में ही सड़ने लगता है।
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