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Shamli News: कागजों में बंट गया पोषाहार, बच्चों तक नहीं पहुंचा निवाला

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- लाभार्थियों को मिला वितरण का मैसेज, बच्चों और गर्भवतियों को दो-तीन माह से इंतजार
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- पड़ताल में खुली व्यवस्था की पोल, लाखों के पोषाहार वितरण में गड़बड़ी की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में कुपोषण से लड़ने के लिए चलाई जा रही पोषण योजना पर सवाल उठने लगे हैं। विभाग की ओर से पोषाहार का ऑनलाइन वितरण दिखा दिया गया, लाभार्थियों के मोबाइल पर राशन मिलने के संदेश भी पहुंच गए, लेकिन हकीकत में कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार पहुंचा ही नहीं।
नतीजा यह रहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों को दो से तीन माह से पोषाहार नहीं मिल सका। संवाददाता की पड़ताल में यह मामला सामने आने के बाद लाखों रुपये के पोषाहार वितरण में गड़बड़ी की आशंका गहरा गई है।
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जिले में 985 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 30 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों तथा कुपोषित बच्चों को हर माह पोषाहार वितरित किया जाता है। विभाग का दावा है कि जून और जुलाई माह तक का पोषाहार भेज दिया गया है, लेकिन कई लाभार्थियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें जून का पोषाहार तक नहीं मिला। इसके बावजूद विभाग की ओर से मोबाइल पर वितरण का संदेश भेज दिया गया।

पड़ताल में सामने आई हकीकत
केस-1 : गांव भड़ी मुस्तफाबाद
उमैर अली ने बताया कि उनके परिवार की पांच वर्षीय बेटी, तीन वर्षीय बेटे और 15 दिन के नवजात शिशु को आज तक आंगनबाड़ी से पोषाहार नहीं मिला। परिवार को योजना की जानकारी तक नहीं दी गई।

केस-2 : गांव जिजौला
असलम ने बताया कि उनके तीन वर्षीय बच्चे को करीब छह माह पहले पोषाहार मिला था। उसके बाद आज तक राशन नहीं मिला, जबकि विभाग की ओर से वितरण का संदेश आता रहा।

केस-3 : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बात
ऊन क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बबिता ने बताया कि उनके केंद्र पर 91 बच्चे पंजीकृत हैं। जून माह का वितरण ऑनलाइन दिखा दिया गया, लेकिन केंद्र पर पोषाहार पहुंचा ही नहीं। ऐसे में बच्चों को राशन कैसे बांटा जाता।
ये तीन मामले केवल उदाहरण हैं। जिले के कई अन्य गांवों में भी लाभार्थियों ने पोषाहार न मिलने की शिकायत की है। इससे वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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- क्या मिलता है पोषाहार में
• 0 से 6 माह तक के बच्चों के लिए : आटा-बेसन मिश्रण (टेक होम राशन)
• 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए : आटा-बेसन मिश्रण, मूंग दाल व दलिया।
• अति कुपोषित एवं कुपोषित बच्चों के लिए : अतिरिक्त पोषण सामग्री (आटा-बेसन मिश्रण, मूंग दाल व दलिया)।
• गर्भवती महिलाओं के लिए : आटा-बेसन मिश्रण तथा मूंग दाल-दलिया के दो-दो पैकेट।
• धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताओं के लिए : आटा-बेसन मिश्रण तथा मूंग दाल-दलिया के दो-दो पैकेट।
ब्लॉकवार कुपोषित बच्चों की संख्या
ब्लॉक
अति कुपोषित
कुपोषित
कैराना
56
386
कांधला
102
483
शामली
21
269
थानाभवन
61
465
ऊन
161
884
ब्लॉकवार कुल संख्या
अति कुपोषित बच्चे: 401
कुपोषित बच्चे : 2,487
कुल (अति कुपोषित + कुपोषित): 2,888 बच्चे
आंगनबाड़ी केंद्रों मेें पढ़ने वाले बच्चों और महिलाओं समेत जिले में कुल लाभार्थी: 30 हजार
फैक्ट फाइल
जिले में आंगनबाड़ी केंद्र : 985
सबसे अधिक कुपोषित बच्चे : ऊन ब्लॉक
जिला अस्पताल के एनआरसी में हर माह 10 से 12 बच्चों का उपचार होता है।
कोट

जून और जुलाई माह तक का पोषाहार भेजा जा चुका है। यदि किसी केंद्र पर पोषाहार नहीं पहुंचा है या वितरण में अनियमितता हुई है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - यामिनी रंजन, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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