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Shamli News: अब सरसों के तेल पर महंगाई की मार

Wed, 08 Jul 2026 01:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। अब सरसों के तेल की बढ़ी कीमतों ने गृहणियों की टेंशन बढ़ा दी है। हफ्तेभर पहले तेल 160-170 रुपये किलो मिल रहा था, अब 200 रुपये तक पहुंच गया है।
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मसाले, रसोई गैस और सब्जियों की महंगाई से जूझ रहे परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। शहर के कारोबारी अंकित व अमित का कहना है कि विदेशों में खाद्य तेलों के दाम बढ़ने और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हुआ है। मंडियों में सरसों की आवक भी कम है। त्योहारी मांग बढ़ने से जमाखोरों ने रेट बढ़ा दिए हैं। किराना कारोबारी राहुल कुमार ने बताया कि सरसों के तेल में महंगाई होने से बाजार में मिलावटी तेल की खपत बढ़ जाएगी।

सिर्फ सरसों के तेल पर निर्भर न रहें
फिजिशयन डा. सचिन मलिक के अनुसार मुंगफली, सोयाबीन तेल का भी रसोई में इस्तेमाल करना चाहिए। तलने के लिए रिफाइंड और तड़के के लिए सरसों तेल रखें। समोसा, टिक्की, पकोडे बिना डीप फ्राई किए बनाएं, 80 फीसदी तक तेल की बचत होगी। नॉन-स्टिक बर्तनों का प्रयोग करें। सप्ताह में तीन दिन उबली सब्जी, दाल, खिचड़ी, इडली, ढोकला बनाएं।
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बोली गृहिणी
ऋचा भारद्वाज ने कहा कि अब पूड़ी-पराठा बनाना कम कर दिया है। बच्चों के टिफिन में भी अब सूखी सब्जी ज्यादा देती हूं। 30 रुपये का फर्क काफी ज्यादा है।
गृहणी डाॅ. रीमा गोयल ने बताया कि पहले की काफी महंगाई से जूझ रहे हैं। तेल की महंगाई के बाद हफ्ते में दो दिन बिना तले उबला या भाप में पका हुआ खाना बनाना शुरू कर दिया है।

गृहिणी अनुप्रीता ने बताया कि बढ़ती महंगाई पर सरकार को लगाम लगानी चाहिए। जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आम आदमी को भी सरकार राहत दें।

गृहिणी मुनेश ने बताया कि हमने तड़के के लिए तेल की मात्रा आधी कर दी है। नॉन-स्टिक कढ़ाई ले ली है, उसमें एक चम्मच तेल में भी सब्जी बन जाती है।
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