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संसाधन न सुविधाएं, कैसे निखरें खेल प्रतिभाएं

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शामली उधम सिंह स्टेडियम - फोटो : SHAMLI
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शामली। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई जाती है, लेकिन जनपद में खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं और संसाधनों का टोटा है। करीब दो दशक पूर्व बने एक मात्र शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम भी सिर्फ नाम का है। वहां पर खेल का सामान तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों को अभ्यास करने की कोई सुविधा यहां नहीं है।
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शहर में भैंसवाल रोड पर नवीन मंडी के पीछे शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम करीब दो दशक पहले बना था। इस स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए सुविधा और संसाधन के नाम पर कुछ नहीं है। स्टेडियम बनने के समय जो खेल का सामान आया था, वह भी खराब हो चुका है और टूटा फूटा पड़ा हुआ है। इसके बाद से कोई सामान खिलाड़ियों के लिए नहीं आया है। कोरोना काल शुरू होने से पहले तक मैदान में सुबह-शाम युवा दौड़ लगाते है। इसके अलावा कुश्ती और कबड्डी आदि खेलते रहे हैं, लेकिन खेल के लिए कोई सामान यहां पर उपलब्ध नहीं है। खिलाड़ियों के लिए संसाधन और सुविधाएं न होने से यहां प्रतिभाएं निखरने के बजाए दम तोड़ती नजर आती है।
जिला स्टेडियम न क्रीड़ा विभाग का दफ्तर
शामली को 28 सितंबर 2011 को नया जनपद बनाया गया था। जनपद को बने हुए करीब नौ साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां पर जिला क्रीड़ा विभाग का कार्यालय तक नहीं खुल पाया है। इसके अलावा जिला खेल स्टेडियम के लिए बजट स्वीकृत होना तो दूर की बात है, अभी तक भूमि का आवंटन तक नहीं हो सका।
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कोट
शहीद ऊधम सिंह ग्रामीण स्टेडियम बनने के समय ही खेल का सामान आया होगा। वह सामान पुराना और खराब हो चुका है। इसके बाद स्टेडियम में खेल का कोई नया सामान नहीं आया है। एथलेटिक्स, कबड्डी, कुश्ती और रेस करने के लिए मैदान में ट्रैक बना हुआ है। - एमएस तोमर, प्रभारी युवा कल्याण अधिकारी।

शामली उधम सिंह स्टेडियम में खराब पडे खेल उपकरण- फोटो : SHAMLI

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