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निजामुद्दीन मरकज पर रहा है कांधला का वर्चस्व

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कांधला (शामली)। दिल्ली की मरकज निजामुद्दीन पर हमेशा कांधला का वर्चस्व रहा है। कांधला से ही इसकी शुरुआत हुई। 1938 में इसने गति पकड़ी और देश विदेश से जमात आने का सिलसिला बढ़ गया। निजामुद्दीन से कांधला, थानाभवन और देवबंद के कस्बे में जमात आई। निजामुद्दीन पर कांधला के ही मौलाना इलियास, मौलना इस्माईल, मौलाना यूसुफ, मौलाना इनाम, मौलाना जुहैर के बाद मौलाना साद कांधलवी सदर बने। सभी ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। क्षेत्र के मौलाना आज के घटनाक्रम पर चिंतित हैं उनका कहना है कि इस समय में सबको सरकारी आदेश का पालन करके अपने घरों में रहना चाहिए।
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कोट
दिल्ली मरकज मे करीब 80 वर्षों से काम हो रहा है। देश-विदेश मे यहां से तब्लीगी जमात का आना-जाना लगा रहता है। हर वक्त यहां पर हजारों लोगों का आना-जाना रहता है। हर खबर सरकार व पुलिस को होती है। हम सब लोगों को सरकार के द्वारा जारी आदेशों को पालन करना चाहिए ओर ऐसी परिस्थिति में अपने घरों में ही रहना चाहिए। -----मौ.राशिद कांधलवी
गढ़ी दौलत के मदरसा के प्रबधक मौलाना आकिल कांधलवी कहते है कि ये कोई जान-बूझकर किया जुर्म नही है, जो लोग मरकज के संपर्क में आए हैं उन्हें अपनी और दूसरों की हिफाजत के लिए सामने आना चाहिए। दिल्ली में जमा हुए लोगों के बारे में उन्होंने कहा कि 22 मार्च से पहले ज्यादा सख्ती नहीं थी, जब से सख्ती हुई थी तब से लोग वहीं पर हैं।
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कांधला में आते ही जूते हाथ में ले लेते थे जमाती
- मुजफ्फरनगर दंगों के बाद कांधला के मौलाना राशिद ने बुढ़ाना में किया था जलसा
कांधला। कांधला से शुरू की गई तब्लीगी जमात के बाद पूरी दुनिया मे कांधला का नाम अदब से लिया जाता है। यहां के निवासी विश्व विख्यात धार्मिक इस्लामिक गुरु मौलाना इफतखार उल हसन से दुआ कराने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते थे। 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद सबसे बड़ा जलसा मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे में हुआ था। इसे कांधला के मौलाना राशिद ने किया। इसमें दोनों समुदाय के धर्मगुरु भी शामिल हुए थे। इस जलसे का मकसद दोनों समुदायों के बीच की दूरी पाटना था। इस जलसे में कई जिलों के लाखों लोगों ने शिरकत की थी।
मौलाना राशिद कांधलवी ने बताया कि कांधला का इतना अदब रहा है कि यहां पर तब्लीगी जमात आने के बाद पैरों के जूते उतारकर हाथों में ले लेते थे। जमात आमतौर पर दो काम करती है मुसलमान सही बने, नमाज अदा कर नेक रास्ते मे चले। जमात अपना पैसा खर्च कर लोगों को दीन के लिए जागरूक व सही दिशा में चलने के लिए लोगों को संदेश देती है।
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