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अगले माह शुरू हो जाएगा जिले का राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नाम

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शामली नवीन मंडी में बनकर तैयार हुआ ई-नाम भवन - फोटो : SHAMLI
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शामली। नवंबर माह में शामली मंडी में राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नाम का शुभारंभ हो जाएगा। 4.45 करोड़ की लागत से मंडी में दो मंजिला भवन तैयार हो गया है। चबूतरे और शेड का निर्माण भी कराया गया है। ई-नाम के माध्यम से किसानों को देशभर में अपनी फसल ऑनलाइन बेचने का प्लेटफार्म मिलेगा। देश के किसी भी कोने में बैठा व्यापारी शामली के किसानों की फसल ऑनलाइन ही खरीद सकेगा और उनके खाते में तत्काल पैसा ट्रांसफर करेगा।
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शासन ने आधुनिक मंडी के रूप में शामली मंडी को शामिल किया था। मंडी निर्माण परिषद की ओर से दो मंजिला भवन का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा चबूतरे, शेड, दो गेट, शौचालय, रंगाई- पुताई, सीसी सड़कें, दुकानों की मरम्मत आदि कार्य कराए गए हैं। सहारनपुर मंडल की कृषि उत्पादन मंडी परिषद निर्माण खंड के उप निदेशक खालिद हसन ने बताया कि नवंबर माह में सभी कार्य पूरे करके व्यवस्था शामली मंडी को सौंप दी जाएगी। शामली मंडी के सचिव संभव कुमार तोमर ने बताया कि ई-नाम भवन में एक ऑपरेटर और फसल की ग्रेडिंग करने वाले तीन कर्मचारी मौजूद रहेंगे। मंडल की उप निदेशक मंडी परिषद रिंकी जायसवाल ने बताया कि आधुनिक मंडी के रुप में मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर की मंडी शामिल है। मंडी में व्यापारियों और किसानों को ई-नाम के माध्यम से आनॅलाइन माल खरीदने और बेचने का प्लेटफार्म मिलेगा। व्यापारियों- किसानों को ऑनलाइन गुड़- खांडसारी के रेट मिलेंगे।
यह है ई-नाम प्लेटफार्म
वर्ष 2016 में ई-नाम योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू की थी। अभी तक इस योजना में 1.70 करोड़ किसान और 1.63 लाख व्यापारी जुड़ चुके हैं। एक हजार से ज्यादा मंडियां इस प्लेटफार्म पर जुड़ चुकी हैं। अब फिर एक हजार मंडियों को जोड़ने की योजना सरकार की है। देशभर में किस फसल का क्या दाम है, इसकी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है।
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लैब में होगी फसल की गुणवत्ता की जांच
ई-नाम लैब में कृषि उत्पादों की गुणवत्ता नापने और तौलने के लिए मशीनें लगाई जाती हैं। किसान माल बेचने से पहले लैब में उत्पाद की गुणवत्ता की जांच कराएगा और उसके बाद स्टाफ उत्पाद को ऑनलाइन अपडेट करता है। जिससे देश के किसी भी क्षेत्र में बैठे व्यापारी उत्पाद की कीमत ऑनलाइन ही लगाता है। बोली तय होने पर व्यापारी माल खरीद लिया जाता है। ऑनलाइन ही किसान के खाते में भुगतान हो जाता है।
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