शामली। मौजूदा समय में चल रहा मौसम गेहूं की फसल के लिए अच्छा है, लेकिन सरसों एवं सब्जियों की फसल को इससे नुकसान हो रहा है। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. शीशपाल सिंह ने बताया कि पिछले साल सर्दी के मौसम में अधिक बूंदाबांदी होने से सरसों के उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई थी।
उनका कहना है कि सरसों कम पानी की फसल है। सरसों का उत्पादन एक हेक्टेयर में 20-25 क्विंटल का उत्पादन का औसत होता है, लेकिन गत वर्ष सरसों का उत्पादन 20- 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का औसत आया था। कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक के मुताबिक कई दिनों तक कोहरा रहने से गेहूं, गन्ना की पौधे की बढ़वर कम होगी। सरसों की फसल में हल्का पीलापन आ जाएगा। सरसों की फसल में जिले के शामली क्षेत्र के बनत, काबड़ौत, झाल आदि गांव मेें माहू का प्रकोप बढ़ गया है। टमाटर, पालक, पत्ता गोभी, लहसुन, प्याज की फसल की मौसम के कारण पत्तियां सूखनी शुरू हो गई हैं। सब्जी की बढ़वार रुकनी शुरू हो गई है।