शामली में नगर पंचायत की बोर्ड बैठक हंगामे के चलते अधूरी रह गई। सभासदों ने स्वकर प्रणाली का विरोध किया और सिटी गार्डन को लेकर चेयरमैन व अधिकारियों में तीखी बहस हुई। बैठक बिना निष्कर्ष के समाप्त हो गई।
थानाभवन में नगर पंचायत की बोर्ड बैठक शुक्रवार को भारी हंगामे के बीच अधूरी रह गई। बैठक में प्रमुख मुद्दों में से एक रहा स्वकर प्रणाली, जिसका सभी सभासदों ने सर्वसम्मति से विरोध किया। इसके साथ ही, सिटी गार्डन बारात घर को ठेके पर दिए जाने और ठेकेदारों के भुगतान को लेकर तीखी बहस हुई। मामला इतना गरमा गया कि चेयरमैन राव मुशयदा बैठक छोड़कर बाहर निकल गईं।
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बैठक का आयोजन दोपहर तीन बजे नगर पंचायत कार्यालय में किया गया था। बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन राव मुशयदा ने की, जबकि संचालन अधिशासी अधिकारी जितेंद्र राणा द्वारा किया गया।
सबसे पहले एजेंडे में स्वकर प्रणाली को रखा गया, जिस पर चर्चा के दौरान सभी उपस्थित सभासदों ने कहा कि यह प्रणाली आमजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगी और इसे तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।
सभासदों ने प्रशासन द्वारा प्रस्तावित स्वकर प्रणाली के विरोध में संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन अधिशासी अधिकारी एवं चेयरमैन को सौंपा और मांग की कि टैक्स की पुरानी व्यवस्था को ही यथावत रखा जाए।
बैठक में दूसरा बड़ा मुद्दा सिटी गार्डन बरात घर को ठेके पर देने का उठा। सभासद महबूब अहमद और बॉबी अरोड़ा ने बरात घर को ठेके पर देने की मांग करते हुए इसे आय का साधन बताया। इस पर अधिशासी अधिकारी ने बोर्ड में प्रस्ताव लाकर वोटिंग कराने की बात कही। लेकिन चेयरमैन ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह विषय एजेंडे में नहीं है, और इस मुद्दे पर बिना पूर्व सहमति के कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। विवाद इतना बढ़ा कि बैठक में हंगामा शुरू हो गया। चेयरमैन ने विरोध जताते हुए मीटिंग से वॉकआउट कर लिया।
बैठक में उपस्थित कुछ सभासदों ने आरोप लगाया कि चेयरमैन द्वारा ठेकेदारों के भुगतान रोक दिए गए हैं, और मीटिंग के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।
इन आरोपों पर सफाई देते हुए चेयरमैन राव मुशयदा ने कहा कि ठेकेदारों की कोई भी भुगतान संबंधी फाइल उनके पास नहीं आई है। यदि फाइल आती है तो जांच के बाद भुगतान किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिटी गार्डन गरीबों की सहूलियत के लिए बना है, इसे ठेके पर नहीं दिया जाएगा। अभद्र भाषा का आरोप गलत है।