कैराना में व्यापारियों के पलायन का मुख्य सूत्रधार था मुकीम
शामली। पश्चिमी उप्र, हरियाणा समेत कई राज्यों में आतंक मचाने वाले कुख्यात मुकीम काला के खौफ से कैराना के व्यापारियों ने पलायन करना शुरू कर दिया था। रंगदारी नहीं देने पर आठ दिन में तीन व्यापारियों की हत्या के बाद पूरे जिले में दहशत बन गई थी। इसके विरोध में करीब 15 दिन तक जिले के बाजार बंद रहे थे। कैराना से व्यापारियों के पलायन का मुख्य सूत्रधार मुकीम काला ही रहा था।
2013 में मुकीम ने कैराना के कई व्यापारियों से रंगदारी मांगी थी। इसके बाद 24 अगस्त 2014 को रंगदारी न देने पर कैराना में आयरन स्टोर के मालिक ममेरे भाई राजू और शंकर की दिनदहाड़े दुकान पर ही गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी।
इस घटना से आठ दिन बाद 14 अगस्त को फुरकान गिरोह में व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष विनोद सिंघल की रंगदारी न देने पर हत्या कर दी थी। आठ दिन में तीन व्यापारियों की हत्या के बाद मुकीम काला की दहशत बन गई थी।
व्यापारियों की हत्या के विरोध में कैराना समेत जिले में सभी बाजार करीब 15 दिन तक बंद रखे गए थे। इसके बाद भी मुकीम काला गिरोह का रंगदारी वसूलने का सिलसिला नहीं थमा, तो उसके आतंक से परेशान होकर व्यापारियों ने कैराना से कारोबार समेटकर पलायन कर दूसरे राज्यों में चले गए थे।
साबिर के मारे जाने पर मुकीम की ताकत हो गई थी आधी
शामली। कुख्यात मुकीम काला के गिरोह में 16 से अधिक बदमाश शामिल थे, जिनमें साबिर जंधेड़ी शॉर्प शूटर था और मुकीम का दायां हाथ माना जाता था। गाजियाबाद में मुकीम के साथ गिरफ्तार हुआ साबिर जंधेड़ी कुछ दिन बाद ही मैनपुरी जेल से फरार हो गया था। तब से पुलिस साबिर के पीछे लगी हुई थी। दो जनवरी 2018 में साबिर जंधेड़ी को पुलिस ने मुठभेड़ में उसके घर पर ही मार गिराया था। इस मुठभेड़ में कैराना कोतवाली में तैनात सिपाही अंकित तोमर शहीद हो गए थे। शहीद सिपाही मूल रूप से बागपत जिल के गांव वाजिदपुर के निवासी थे।