मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. तरुण पाल के मुताबिक, आत्मघाती सोच रखने या ऐसा कदम उठाने वालों में सबसे बड़ा अनुपात 20 से 45 साल के युवाओं का है। उन्होंने बताया कि पहले मरीज अन्य डॉक्टरों के कहने पर आते थे लेकिन अब जागरूकता बढ़ने से लोग खुद परामर्श लेने पहुंच रहे हैं। समय पर काउंसलिंग और दवाओं के सहयोग से अधिकांश लोग अब सामान्य जीवन जी रहे हैं। जनचेतना फैलाने के उद्देश्य से हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा का कहना है कि आत्मघाती कदम तात्कालिक आवेश का नतीजा नहीं बल्कि लंबे समय से अंदर घुट रही समस्याओं का विस्फोट होता है। इसके प्रमुख कारणों में गहरा अवसाद, बेरोजगारी, माली तंगी, दांपत्य व प्रेम संबंधों में बिखराव, घरेलू कलह, अकेलापन, असफलता का खौफ और नशे की आदत मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।
शास्त्रीनगर की एक महिला ने दांपत्य संबंधों में खटास के चलते गंभीर अवसाद में आकर दो बार विषपान कर जान देने की कोशिश की मगर परिजनों की मुस्तैदी से उन्हें बचा लिया गया। अब उनकी मेडिकल में काउंसिलिंग चल रही है।
जागृति विहार के एक युवक ने प्रेमिका से अनबन के बाद क्षुब्ध होकर सीलिंग फैन से फंदा लगाने का प्रयास किया। ऐन वक्त पर स्वजनों के देख लेने से अनहोनी टल गई। मेडिकल में काउंसिलिंग के बाद अब युवक ठीक है।
बचाव व रोकथाम के प्रभावी उपाय
-मानसिक तनाव झेल रहे व्यक्ति की बात बिना टोके ध्यान से सुनें। उसे विश्वास दिलाएं कि वह अकेला नहीं है।
-डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देते ही संकोच छोड़कर तत्काल मनोवैज्ञानिक अथवा मनोचिकित्सक से उपचार शुरू कराएं।
-विद्यालयों, महाविद्यालयों और कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नियमित जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएं।
127 लोगों ने की आत्महत्या
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में इस साल एक जनवरी 2026 से लेकर 31 अगस्त 2026 तक 127 लोगों ने आत्महत्या की है। इनमें 79 पुरुष या युवक और 48 महिलाएं या युवतियां थीं। आत्महत्या की वजह गृह क्लेश, परीक्षा का दबाव, मानसिक परेशानी, मुकदमों का दबाव, व्यापार में घाटा, बेरोजगारी आदि रहे। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले का कहना है कि आत्महत्या की कोशिश की सूचना पर पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए लोगों को बचाती है।