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Shamli News: एक क्लिक पर दुनिया देखेगी मौलाना थानवी की विरासत

Fri, 20 Mar 2026 01:04 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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मौलाना अशरफ अली थानवी का फाइल फोटो। मदरसा
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शामली। दुनियाभर में दीनी तालीम की अलख जगाने वाले थानाभवन की माटी में जन्मे मौलाना अशरफ अली थानवी की शिक्षाएं अब डिजिटल रूप में देश-विदेश तक पहुंचेंगी। उनकी लिखी किताबों और जीवन से जुड़ी उपलब्धियों को जल्द ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे विदेशी अकीदतमंद भी एक क्लिक पर उन्हें जान सकेंगे।
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इसी कड़ी में थानाभवन स्थित मदरसा खानका में लगभग एक हजार वर्गफुट क्षेत्र में अत्याधुनिक लाइब्रेरी तैयार की जा रही है। इस लाइब्रेरी में छात्र न केवल उनकी किताबों का अध्ययन कर सकेंगे, बल्कि उनके विचारों और शिक्षाओं पर शोध (रिसर्च) भी कर पाएंगे। संवाद

दीनी तालीम का बड़ा नाम, 950 से अधिक किताबों की विरासत
मौलाना अशरफ अली थानवी ने जीवनकाल में 950 से अधिक दीनी किताबें लिखीं, जिनमें ‘बहिश्ती जेवर’ और ‘बयान-उल-कुरान’ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उनकी लिखी किताबें आज भी देशभर के मदरसों में पढ़ाई जाती हैं और रमजान के महीने में उनकी मांग और अधिक बढ़ जाती है।
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1863 में थानाभवन में जन्म, देवबंद से हासिल की उच्च शिक्षा
मौलाना थानवी का जन्म 19 अगस्त 1863 को थानाभवन में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के बाद दारुल उलूम देवबंद से उच्च इस्लामी शिक्षा प्राप्त की और अपनी विद्वता के बल पर एक महान शिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में पहचान बनाई। 83 साल 3 माह 11 दिन की उम्र में उनका 19 जुलाई 1943 में इंतकाल हो गया था।

हकीमुल उम्मत के नाम से मिली पहचान
अपनी गहरी धार्मिक समझ और समाज को सही दिशा देने के प्रयासों के चलते उन्हें हकीमुल उम्मत यानी उम्मत का मार्गदर्शक कहा गया। उन्होंने हजारों छात्रों को शिक्षा दी और समाज में नैतिकता व आध्यात्मिकता को बढ़ावा दिया।

देश ही नहीं, विदेशों में भी गूंजता है नाम
मौलाना थानवी का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं रहा। पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित कई देशों में उनके अनुयायी हैं। वर्ष 2000 से पहले उनकी मजार पर विदेशों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचते रहे हैं। अब रमजान में देशभर के विभिन्न हिस्सों से अकीदतमंद पहुंच रहे हैं।


ऑनलाइन होगी उपलब्धता, बढ़ेगा शोध का दायरा
मदरसा खानका के शिक्षक सैयद उजेफा नजम थानवी के अनुसार लाइब्रेरी लगभग तैयार है और जल्द ही मौलाना थानवी की किताबों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की योजना है, जिसके लिए एक कंपनी से बातचीत चल रही है। उनकी किताबों से लेकर मस्जिद, मजार और अन्य उपलब्धियों को ऑनलाइन कराया जाएगा। कारी साजिद का कहना है कि मौलाना थानवी ने 950 से अधिक किताबें लिखीं और उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। वह खुद एक संस्थान थे।
अत्याधुनिक लाइब्रेरी की खासियत

इसमें डिजिटल संग्रह, अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब, हाई-स्पीड वाई-फाई, टैबलेट, और स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाएं होंगी।

मजार क्षेत्र का होगा सुंदरीकरण
मदरसा खानका के प्रबंधक मौलाना नजमुल हसन ने बताया कि मजार के आसपास क्षेत्र का सुंदरीकरण कराया जाएगा, ताकि दूर-दराज से आने वाले अकीदतमंदों को बेहतर माहौल मिल सके। अकीदतमंदों के लिए गेस्ट हाउस भी बनवाया जाएगा।

मौलाना अशरफ अली थानवी का फाइल फोटो। मदरसा

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