शामली। श्री हनुमान धाम स्थित मराठाकालीन मनकामेश्वर महादेव मंदिर का 500 साल पुराना इतिहास है। मान्यता है कि सिद्धेश्वर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और शिव ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है।
कभी शहर से बाहर निर्जन स्थान पर श्रीहनुमान धाम स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर स्थित था। जो मराठा कालीन इतिहास की यादें संजोए हैं, लेकिन यह रमणीक स्थान अब शहर के मध्य आ गया है। बताया जाता है कि दिल्ली को मुगलों से आजाद करने के लिए मराठाओं ने दिल्ली के आसपास शिव मंदिरों का निर्माण कराया था। शिवमंदिरों को सुरंग के माध्यम से एक-दूसरे को जोड़ा गया था। आज सुरंग तो नहीं है, लेकिन मिट्टी के टीले पर महाभारत कालीन हनुमान मंदिर और मनकामेश्वर महादेव मंदिर और तालाब था।
पिछले 65 सालों में श्री हनुमान धाम पर्यटन के रुप में विकसित हो रहा है। 14 सितंबर वर्ष 1965-66 में ओम कुमार द्विवेदी, त्रिलोकचंद मित्तल के नेतृत्व में इस पवित्र स्थल को विकसित करने का बीड़ा उठाया था। मौजूदा दौर में शिव सरोवर में द्वादश शिव ज्योतिर्लिंग को स्थापित करने कार्य चल रहा है। श्री हनुमान धाम के प्रधान सलिल द्विवेदी, सचिव के रुप में राजकुमार मित्तल मंदिर समिति की बागडोर संभाले हैं।
दिग्गज राजनेता कर चुके हैं पूजा-अर्चना
श्रीहनुमान धाम के तत्कालीन प्रधान ओमकुमार द्विवेदी के नेतृत्व में श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार का शिलान्यास 10 अक्तूबर 1970 को भारत में नेपाल के राजदूत सरदार भीम बहादुर पांडे के कर कमलों से हुआ था। मंदिर देश की चारों पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, गूजरमल मोदी, पूर्व रेलमंत्री केदार नाथ पांडे, पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह सहित दिग्गज नेता पूजा-अर्चना कर चुके हैं।
हनुमान धाम का इतिहास महाभारत कालीन है
हनुमान धाम के प्रधान सलिल द्विवेदी बताते हैं कि श्री हनुमान धाम का इतिहास महाभारत कालीन है। पांडव के वनवास काल में इसी स्थान पर हनुमानजी ने भीम को दर्शन दिए थे। भीम ने रास्ते से पूंछ हटाने को कहा था, तो हनुमान जी ने उनका अभिमान का मर्दन किया था। भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण अपने सखा अर्जुन के साथ हस्तिनापुर से कुरुक्षेत्र युद्ध के लिए जाने के दौरान यहां विश्राम किया था। हनुमान जी को अर्जुन के रथ पर विराजमान करके रवाना हुए थे। पीली मिट्टी के टीले पर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर में बरना का पेड़ मौजूद था।