दाम तो छोड़िए लागत भी निकालना हुआ मुश्किल
शामली/झिंझाना। जनपद के किसान एकतरफ लॉकडाउन तो दूसरी तरफ मौसम की मार झेलने को मजबूर हैं। लॉकडाउन में सब्जी की फसलों के दाम नहीं मिले, जिस कारण खेत में ही जुताई करनी पड़ी। लागत भी हाथ नहीं लगी। उधर, मौसम की मार से सरसों की फसल खेत में झड़ गई तो गेहूं को पीला रोग ने अपनी चपेट में ले लिया। गेहूं का उत्पादन भी आधा ही हुआ है। अमर उजाला ने किसानों से बातचीत कर पड़ताल की। पेश है रिपोर्ट...
गोभी की फसल को खेत में ही जोतना पड़ा
कस्बा झिंझाना निवासी किसान रमेश ने बताया की उसके पास आठ बीघा कृषि भूमि है। उसी में अपने परिवार के गुजारे के लिए सब्जी आदि उगाकर जीवनयापन करते हैं। लॉकडाउन से पहले पांच बीघा भूमि में पत्ता गोभी और फूल गोभी की फसल बोई थी। पत्ता गोभी का इस्तेमाल ज्यादातर बाजार में चाऊमीन, बर्गर आदि फास्टफूड बनाने में इस्तेमाल होता है। जब फसल तैयार हुई तो लॉकडाउन हो गया। लॉकडाउन में दुकानें बंद होने से पत्ता गोभी की डिमांड खत्म हो गई। मंडी में लेकर जाने के बाद इतनी कम कीमत मिलती थी कि ले जाने का किराया अपनी जेब से देना पड़ा है। पत्ता गोभी को बोने में लागत करीब 12 हजार रुपये आई थी और मिला कुछ नहीं। फूल गोभी में भी इतनी लागत आई थी और बिकी सात हजार की। मजबूरी में फसल को खेत में ही जोतना पड़ा है। आढ़ती से पहले 15 हजार रुपये उधार लिए थे। अब नई फसल बोने के लिए फिर और रुपये उधार लेने पड़ेंगे।
सब्जी की फसल में लागत भी नहीं मिली
कस्बा झिंझाना के किसान राधेश्याम ने बताया की उसके पास पांच बीघा जमीन है। उसने तीन बीघा लौकी और खीरे की फसल बोई थी। मंडी में खीरा लौकी ढाई रुपये किलो बेचनी पड़ी है। इसके अलावा टमाटर की फसल को भी खेत में ही काटना पड़ा है। टमाटर की फसल की लागत भी नहीं मिली है। अब करेला की फसल बोई है। इसमें कुछ बचत हो जाए तो ठीक रहेगा, वरना हालत खराब हो जाएगी। सरकार को भी चाहिए कि किसानों की तरफ ध्यान दे और उन्हें कुछ राहत दे।
फसलों पर बीमारी और मौसम की पड़ी मार
गांव टिटौली के किसान राजीव शास्त्री ने बताया कि इस साल मौसम की मार से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। पीले रोग ने गेहूं की फसल को चौपट कर दिया। उसने 15 बीघा गेहूं की फसल बोई थी। पिछले साल के मुकाबले आधा भी गेहूं नहीं निकला। पांच बीघा सरसों बोई थी। बारिश और ओलावृष्टि से सरसों की फसल को मोटा नुकसान हुआ। उसमें भी कुछ नहीं निकला। ओलावृष्टि से खेत में झड़ गई। मौसम की वजह से इस बार गेहूं व सरसों की फसल में लागत भी नहीं मिली।