शामली के गांव गोहरनी स्थित पीएमश्री विद्यालय में बिना ड्रैस के भोजन बनाती रसोइयां। संवाद
शामली। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को साफ-सुथरा भोजन देने के लिए सरकार रसोइयों के लिए सुरक्षा किट मुहैया कराने का बजट हर साल देती है। रसोइयों को एप्रेन, कैप और ग्लब्स देने के लिए सालाना 700 रुपये दिए जाते हैं पर अधिकतर स्कूलों में बिना किट पहने ही रसोइये खाना बना रही हैं। जिस कारण बच्चों की थाली असुरक्षित है।
जनपद में 596 स्कूल संचालित हैं। 700 रुपये के हिसाब से 596 स्कूलों पर हर साल 4 लाख 17 हजार 200 रुपये का बजट खर्च किया जाता हैं फिर भी बच्चों की थाली असुरक्षित है। सरकार हर साल परिषदीय स्कूलों में बच्चों को सुथरा और पौष्टिक मिड-डे मील देने के लिए लाखों रुपये खर्च करती है। इसी क्रम में कोविड से पहले ही रसोइयों को एप्रेन, कैप और ग्लब्स देने का आदेश जारी किया गया था। कुल 596 स्कूलों में मिड-डे मील योजना चल रही है। इनमें से लगभग 571 परिषदीय विद्यालयों में रसोइयाएं खाना बनातीं हैं। जबकि शामली नगर के लगभग 25 स्कूलों में सामग्री एनजीओ पहुंचाती है।
मिड-डे मील जिला समन्वयक जितेंद्र कुमार ने बताया कि हर स्कूल को 700 रुपये हर साल दिए जाते हैं। सभी रसोइयों को एप्रेन, कैप और ग्लब्स पहनना जरूरी है। वहीं मंगलवार को स्कूलों में पहुंचकर पड़ताल की तो, किसी भी स्कूल में रसोइयों के पास कोई ड्रेस नहीं मिली। बिना ड्रेस के ही भोजन बनाती नजर आई।
मिड-डे मील के खाते में आता है पैसा : ड्रेस के सामान का पैसा मिड-डे मील वाले खाते में आता है, जिसे प्रधानाध्यापक के द्वारा ही निकालकर सामान लाकर देना होता है, लेकिन इस बारे में अधिकतर रसोइयों काे पता ही नहीं और वह बिना ड्रेस ही खाना बनाने में लगी रहतीं हैं।
शामली के गांव गोहरनी स्थित पीएमश्री विद्यालय में बिना ड्रैस के भोजन बनाती रसोइयां। संवाद