केदारनाथ घाटी की तबाही के बीच शामली के 30 से अधिक श्रद्धालु फंसे हैं। इनमें से 10 वापस आ गए, मगर 20 अभी भी विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। वहां फंसे श्रद्धालुओं ने फोन पर आपबीती सुनाई....
केदार घाटी में बुधवार की रात लिनचोली व भीमबली के बीच भूस्खलन के बाद जिले के 30 से अधिक श्रद्धालु फंस गए थे। इनमें से 10 वापस आ गए, मगर 20 अभी भी विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि एक बार तो उन्हें लगने लगा था कि आज नहीं बच सकेंगे। मगर स्थानीय लोग फरिश्ते बनकर पहुंचे और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। जबकि फंसे श्रद्धालुओं से परिजनों का अब कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। श्रद्धालुओं ने कुछ यूं आपबीती सुनाई....
विज्ञापन
ऐसा लगा कि आज तो बचेंगे ही नहीं
चौसाना निवासी गिन्नी ने बताया कि मैं और मेरे अन्य साथी पहाड़ी पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पास में ही बादल फट गया। जिस कारण हमें डर लग रहा था। कुछ शिवभक्तों ने शोर भी मचा दिया। मैं और मेरे साथी एक साथ भागकर पास में ही बनी एक टीन में चले गए। जहां पर शोर शराबे की आवाज सुनाई दे रही थी। रात के करीब एक बजे होंगे। भूख भी तेज लग रही थी।
मगर जान बचाने का डर लग रहा था। दिमाग में बस यही चल रहा था कि आज उनकी जान नहीं बचेगी। करीब 36 घंटे तक रहे। घरवालों की भी याद आ रही थी। किसी भी रेस्क्यू टीम या फिर अन्य ने कोई मदद नहीं की। कुछ स्थानीय लोगों ने रास्ता बताकर पहाड़ी से नीचे उतरवाया, जो हमारे लिए फरिश्ते से कम नहीं थे। नीचे उतरने पर जरूर एक जवान ने रास्ता बताया। तब कहीं जाकर घर के लिए रवाना हुए।
विज्ञापन
पहाड़ियों पर रहने वाले लोग बने मददगार, डर लगा रहा
चौसाना के रहने वाले ऋषभ ने बताया कि बादल फटने से डर लग रहा था कि आज वह पानी में बह जाएंगे। किसी की भी जान नहीं बचेगी। भगवान से मदद की गुहार कर रहे थे। स्थानीय लोगों की मदद से वहां के प्रशासन को सूचना भिजवाई। मगर कोई सुनवाई नहीं की गई। करीब छह घंटे एक टीन शेड में बिताए। इसके बाद वहां के स्थानीय दो लोग मिले, जिन्होंने मदद करते हुए हमें पहाड़ी से नीचे उतरने का रास्ता बताया। किसी तरह बाइकों से नीचे आए। नीचे एक जवान मिला, जिसने जरूर मदद की। कहा कि केदारनाथ प्रशासन यदि मदद करता तो वह काफी पहले वहां से निकल सकते थे। भगवान के आशीर्वाद के कारण ही वहां से निकल सके।
नहीं हो पा रहा संपर्क, मंदिर में की पूजा-अर्चना
फंसे दीपक के भाई गौरव ने बताया कि पिछले कई घंटों से दीपक और अन्य से परिवार के किसी भी सदस्य का संपर्क नहीं हो पाया है। सभी की सलामती के लिए मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना कराई गई है। भगवान से सभी के सकुशल आने की प्रार्थना की जा रही है। वहां के प्रशासन को भी श्रद्धालुओं को बचाने के लिए प्रयास करने चाहिए। क्योंकि प्रशासन बिल्कुल भी मदद नहीं कर रहा है। अब किसी से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। दीपक ने बताया था कि उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है। भूख सभी को अधिक लग रही है।
ये निकल चुके हैं...
चौसाना के रहने वाले वंश मित्तल, विशांक कौशिक, दिवेश, ऋषभ गौतम, दाढ़ीनगर निवासी कुलदीप, बोबी, चौसाना निवासी सन्नी, कमल, मनीष आदि घर के लिए हो चुके रवाना। फंसे वंश के पिता राजेश ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि सभी सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हैं। जल्द ही घर आ जाएंगे।
ये श्रद्धालु फंसे
ऊन और सिंभालका के श्रद्धालु फंसे हैं। जिनमें दीपक, कुलदीप, मोंटी, सागर व सिंभालका के प्रताप, अनुज, प्रदीप, अंकुर, पंकज, काला, आतिश, निंदर, कुलदीप आदि ।