2019 के अंतरिम बजट में रेलवे परियोजनाओं के बारे में जिक्र न करके जिले के लोगों को मायूसी मिली है। मेरठ-पानीपत, कैथल, करनाल, शामली और मेरठ नई रेलवे लाइन के लिए बजट में उपेक्षा होने से निराशा मिली है।
तीन साल पूर्व आम बजट में तत्कालीन केंद्रीय रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु ने दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे के दोहरीकरण विद्युतीकरण के लिए 1500 करोड़ रुपये, मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए 2200 करोड़ रुपये व कैथल- करनाल, शामली और मेरठ रेलवे नई रेलवे लाइन के सर्वे की घोषणा की गई थी। बजट का प्राविधान होने के तीन साल में मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन की प्रगति नही आई है, अभी तक इस रेलवे लाइन का कार्य अधर में लटका हुआ है। मेरठ-शामली, करनाल और कैथल रेलवे लाइन की तीन साल पूर्व सर्वेक्षण की घोषणा हुई थी। तीन साल में सिर्फ मेरठ- शामली, करनाल कैथल तक नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए सिर्फ सर्वेक्षण हो पाया है। इस अंतरिम बजट में इस नई रेलवे लाइन के लिए लोग बजट जारी करने के लिए उम्मीद लगाए थे। 2019 के अंतरिम बजट में दोनो नई रेलवे लाइन के संबंध में चर्चा तक नहीं की गई है।
जिले के उद्यमी-व्यापारियों सहित आम नागरिकों को उम्मीद थी कि मेरठ-पानीपत, कैथल, शामली, पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए अंतरिम बजट में नई रेलवे लाइन के विस्तार के बारे चर्चा होती, तो हरियाणा और वेस्ट यूपी के जिले में रेल यात्रियों को आवागमन की सुविधा मिलती। हरियाणा और पंजाब में उद्यमियों के कारोबार को बढ़ावा मिलता। रेलवे के आरटीआई कार्यकर्ता संजय सैनी का कहना कि अंतरिम बजट में मेरठ-पानीपत, कैथल-करनाल शामली मेरठ नई रेलवे लाइन की उपेक्षा की गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्यामदास गर्ग का कहना है कि अंतरिम बजट में लखनऊ, इलाहाबाद, जम्मू काश्मीर में माता वैष्णो देवी के लिए लंबी दूर की ट्रेनों की घोषणा नहीं की गई है। मेरठ- पानीपत, कैथल-करनाल, शामली मेरठ नई रेलवे लाइन के संबंध में सोचा नहीं गया है।