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कहीं नोट खत्म, कहीं एटीएम बंद, सहकारी बैंकों का 500 अौर एक हजार के नोट लेने से इंकार

Wed, 16 Nov 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला / ब्यूरो/ बागपत
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सिंघौली तगा में सहकारी समिति में पुराना नोट न लेने पर विरोध करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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बागपत।  आर्थिक सुधार के लिए केंद्र सरकार की ओर से उठाए कदम के बाद मची आफत से राहत मिलती नहीं दिख रही। छुट्टी के बाद बैंक खुले तो हंगामे हुए। बैंकों में दिनभर अफरा-तफरी रही। सहकारी बैंकों ने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट ही लेने से इंकार कर दिया। इस पर अग्रवाल मंडी टटीरी में जमकर हंगामा हुआ। 
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मंगलवार को भी बैंकों के बाहर लोगों की कतार कम होने के बजाए बढ़ी दिखी। एटीएम दोपहर होते-होते हांफ गए। अग्रवाल मंडी टटीरी में सहकारी बैंक ने पुराने नोट लेने से ही इंकार कर दिया, इस पर यहां हंगामा बरपा। सिंडीकेट बैंक पर भी व्यापारियों ने प्रदर्शन किया। चांदीनगर, बालैनी, अमीनगर सराय, बिनौली, छपरौली, पिलाना, खेकड़ा समेत जिलेभर में हंगामे के हालात रहे। बैंक खुलने से पहले और बंद होने तक लोगों की कतारें रही। लोगों को पर्याप्त कैश नहीं मिला, जिस कारण बुधवार को भी यही हाल रहेगा। डौला गांव में मेरठ-बागपत रोड पर ही लंबी लाइन लग गई। 

विकलांगों के लिए कोई व्यवस्था नहीं : सरकार की घोषणा के बावजूद बैंकों और डाकघरों में विकलांगों के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। महिलाओं को भी पुरुषों की लाइन में लगकर ही शाखाओं तक पहुंचना पड़ा। डौला गांव के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। डीएम से मांग की विकलांगों के लिए अलग से काउंटर खोले जाने चाहिए।
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समिति से निराश लौटे किसान

साधन सहकारी समिति सिंगौली तगा से खाद और बीज खरीदने पहुंचे किसानों से पुराने नोट स्वीकार नहीं किए, इस कारण यहां किसानों को निराशा ही हाथ लगी। किसानों ने कहा सरकार उन्हें बताएं कि वह कैसे गेहूं की बुआई करें।

बीज भंडार पर चलेंगे पुराने नोट

सहायक कृषि निरीक्षक छपरौली महेश खोखर ने बताया बीज भंडारों पर पुराने नोटों को स्वीकार किया जाएगा। अधिकारियों की ओर से उन्हें निर्देश  प्राप्त हो गए हैं। किसान भाइयों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। किसान बीज भंडार पर पहुंचे और पुराने नोट के आधार  पर ही खरीदारी करें, कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।

बताइए, कैसे भेजूं अपनी डाक

बागपत। डाकघर के बाहर सैकड़ों लोग जमा हैं। शहर निवासी राजेंद्र सिंह को मध्य प्रदेश में रेलवे को रजिस्ट्री करनी है, लेकिन वह काउंटर तक कैसे पहुंचे। कोई सिस्टम नहीं है। राजेंद्र कहता है कि यहां पहुंचने का यह उसका दूसरा दिन है, लेकिन रोजाना डाक को घर लेकर जाना पड़ता है। पहले दिन उसके एक हजार के नोट को स्वीकार नहीं किया, किसी तरह खुले लेकर आया तो भीड़ बढ़ गई।

बैंकों की नेटवर्किंग भी ठप

अग्रवाल मंडी टटीरी। बैंकों का नेटवर्किंग सिस्टम भी थकने लगा है। कई बैंकों में मंगलवार को व्यवस्था खराब रही, जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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