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Shamli News: अस्पताल के बाहर लिखा डॉक्टर बाहर, अंदर चल रहा अल्ट्रासाउंड

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स्टिंगकैराना का ​शिफा अल्ट्रासाउंड सेंटर। संवाद
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- जिले के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर नियमों की उड़ रही धज्जियां
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- कागज पर डॉक्टर, हकीकत में टेक्नीशियन, मरीजों की जान पर खेल
- टेक्नीशियन और नौसीखिए मरीजों की जान से खेल रहे, विभागीय अधिकारी अनजान
शामली। जिले के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट और डॉक्टर, सोनोलॉजिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य होने के बावजूद यहां नौसीखिए और टेक्नीशियन अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। बिना डॉक्टर की पर्ची और सलाह के सीधे 500 रुपये देकर अल्ट्रासाउंड कराया जा सकता है। यही नहीं टेक्नीशियन खुद ही डाॅक्टर के हस्ताक्षर कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं। संवाददाता ने तीन दिन की पड़ताल में इसका खुलासा किया। पड़ताल में चौंकाने वाला सच सामने आया।
स्थान – देव नर्सिंग होम, मुजफ्फरनगर रोड



संवाददाता : अल्ट्रासाउंड कराना है, हो जाएगा क्या?
कर्मचारी : हां, हो जाएगा… 500 रुपये लगेंगे।

संवाददाता: ठीक है, 500 रुपये जमा करा देते हैं।

कर्मचारी : कमरा नंबर तीन में चले जाओ।

संवाददाता : ओके।



(अंदर अल्ट्रासाउंड कक्ष में महिला कर्मचारी मौजूद)
संवाददाता : अल्ट्रासाउंड कराना है, आप ही करेंगी?
महिला कर्मचारी : हां, मैं ही करूंगी।

संवाददाता : लेकिन बाहर तो लिखा है डॉक्टर साहब बाहर गए हैं, अल्ट्रासाउंड बंद रहेगा।

कर्मचारी : हां, डॉक्टर साहब कल आ जाएंगे। आप लेट जाइए, मैं ही कर दूंगी अल्ट्रासाउंड।

संवाददाता : डॉक्टर कहां गए हैं?
महिला कर्मचारी : बाहर गए हैं, कल तक आ जाएंगे।
(कुछ देर बाद महिला कर्मचारी ने ही संवाददाता का अल्ट्रासाउंड कर दिया।)
- स्थान – शिफा अल्ट्रासाउंड सेंटर, शामली रोड (कैराना)
मरीज : अल्ट्रासाउंड कराना है, हो जाएगा क्या?
कर्मचारी : अंदर चले जाओ, हो जाएगा।

मरीज: डॉक्टर साहब नहीं हैं क्या?
कर्मचारी : डॉक्टर साहब बाहर गए हुए हैं, कर्मचारी कर देगा।
(अंदर टेक्नीशियन प्रिंस ही मरीज का अल्ट्रासाउंड कर रहे थे। रिसेप्शन पर बताया गया कि रेडियोलॉजिस्ट राजेश कुमार बाहर काम से गए हैं।)



स्थान – कांधला के निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर
संवाददाता : अल्ट्रासाउंड कराना है।

कर्मचारी : हो जाएगा, रुपये जमा करा दो।

(पैसे जमा कराने के बाद जब डॉक्टर के बारे में पूछा)

कर्मचारी : डॉक्टर बाहर गए हैं, अभी नहीं होगा। दो दिन बाद आना।



यह तो महज बानगी है। जिले के अन्य कुछ प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भी यही हाल है। प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट और डॉक्टर की जगह टेक्नीशियन व कर्मचारी ही हर रोज लोगों की जान जोखिम में डालकर अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं।
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- नियम क्या कहते हैं
एसीएमओ और पीसीपीएनडीटी के नोडल डॉ. अतुल बंसल ने बताया कि—
केवल रेडियोलॉजिस्ट, एमबीबीएस डॉक्टर, गायनाकोलॉजिस्ट, एमडी सर्जन या एमडी मेडिसिन ही अल्ट्रासाउंड कर सकते हैं।
किसी टेक्नीशियन या अन्य कर्मचारी को अल्ट्रासाउंड करने का अधिकार नहीं है।
पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत मशीन का पंजीकरण, डॉक्टर की मौजूदगी, रिकॉर्ड का रखरखाव और लिंग-निर्धारण पर रोक अनिवार्य है।
...
नौसिखियों द्वारा अल्ट्रासाउंड कराना गंभीर मामला है। सीएमओ से जवाब-तलब किया जाएगा और दोषी सेंटर संचालकों पर सख्त कार्रवाई होगी। लोग ऐसी शिकायत करें तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी। - अरविंद कुमार चौहान, जिलाधिकारी शामली

कल ही नियमों का पालन न करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर छापा मारा जाएगा। किसी भी सूरत में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। - डॉ. अतुल बंसल, एसीएमओ शामली
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- जिले में 39 प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटर
जिले में इस समय 39 प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार समय-समय पर छापेमारी की जाती है, लेकिन संवाददाता की स्टिंग ने हकीकत सामने ला दी है कि ज्यादातर केंद्रों पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
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