शामली। गैस रिसाव प्रकरण में दिल्ली से आई टीम ने सरशादीलाल शुगर मिल के बायोगैस प्लांट पर पहुंचकर तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की। सभी से अलग अलग बातचीत कर बयान लिया। वहीं, मैली रोड पर केमिकल गोदाम के बारे में भी पूछताछ की। केमिकल गोदाम मंगलवार को बंद मिला।
सर शादीलाल शुगर मिल डिस्टलरी यूनिट के बायोगैस प्लांट से 10 अक्तूबर को गैस रिसाव के कारण सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल और बालिका इंटर कॉलेज के करीब 300 छात्र-छात्राओं की तबीयत खराब हो गई थी। गहनता से छानबीन करने के लिए दिल्ली से केंद्रीय रोग नियंत्रण की टीम कई दिन से शामली में डेरा जमाए हुए हैं।
टीम ने दोनों स्कूल के बच्चों और दयानंदनगर मोहल्ले के लोगों से बातचीत का पूरा ब्योरा कंप्यूटर में फीड किया। इसके बाद मंगलवार दोपहर टीम शुगर मिल के बायोगैस प्लांट पर पहुंची। वहां पर उन्होंने प्लांट में दोनों शिफ्ट में डयूटी करने वाले सभी कर्मचारियों और अधिकारियों से वार्ता की।
अलग कक्ष में एक एक कर्मी को बुलाकर 10 अक्तूबर की घटना की जानकारी ली और कई सवालों के जवाब पूछे। इसके बाद टीम फिर से मैली रोड पर पहुंची। मैली रोड पर केमिकल गोदाम के बारे में पूछा। हालांकि टीम को केमिकल गोदाम पर गेट का ताला लगा हुआ मिला। जिसके बाद टीम ने शुगर मिल द्वारा डाली गई राख वाले स्थान पर पहुंचकर फिर से जांच की।
मैली रोड के लोगों ने बताया, चार दिन तक रहा था मुंह कड़वा
टीम ने शुगर मिल से खेडीकरमू और लिलौन वाले मार्ग पर पहुंचकर वहां आसपास के कुछ मकानों में रहने वालों से घटना के संबंध में जानकारी ली। वहां रहने वाले नरेश से पूछा कि 10 अक्तूबर को क्या तुम्हें या तुम्हारे परिवार के लोगों को भी कुछ दिक्कत हुई थी। इस पर नरेश कुमार ने बताया कि घटना वाले दिन मुंह कड़वा हो रहा था और सांस लेने में दिक्कत थी। उसका असर चार दिन तक रहा था। नरेश की पत्नी ऊषा और बेटी किरण ने भी इसी तरह की दिक्कत बताई। यहां छानबीन करने के बाद टीम लौट गई।