कैराना। सिद्ध पीठ बाबा बनखंडी मंदिर परिसर में संगीतमय श्री हरि की कथा के दूसरे दिन श्री श्री 1008 परमहंस स्वामी विशुद्धानंद महाराज के शिष्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा के माध्यम से ज्ञान वैराग्य जब तक जवीन में नहीं उतारोगे तब तक भक्ति का प्रादुर्भाव नहीं हो सकता है।
स्वामी स्वरूपानंद ने वेदव्यास, विदुर, पितामह भीष्म के प्रसंग सुनाए। साथ ही द्रोपदी, उत्तरा और कुंती आदि देवियों के प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि कुंती ने भगवान से केवल दुख मांगा, क्योंकि भगवान दुख में ही याद आते हैं। पितामह भीष्म ने सूर्य उत्तरायण में होने से और अपनी बुद्धि को भगवान के चरणों में अर्पण किया और अपने शरीर का परित्याग कर दिया। युद्धिष्ठर को दान धर्म, राज धर्म, स्त्री धर्म और मोक्ष धर्म का उपदेश दिया। कथा में पंडित स्वराज शर्मा, राकेश वर्मा, अनिल मित्तल, सुशील सिंघल, अशोक कुमार, रमेश चंद, नरेंद्र कुमार, अजय, रविंद्र कुमार, अंकुर भारद्वाज, शगुन मित्तल आदि मौजूद रहे।