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वायरल बुखार के साथ मलेरिया का बढ़ा खतरा

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शामली। जिले में वायरल के साथ मलेरिया बुखार का भी खतरा बढ़ रहा है। इस साल के पहले पांच महीने में 23 केस मलेरिया के मिल चुके हैं। इनमें मई माह में ही मलेरिया के सात केस सामने आए हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल में मलेरिया के ज्यादा केस सामने आ रहे हैं। 2021 में कुल 57 केस मिले थे। चिकित्सकों का कहना है कि मलेरिया से बचाव के लिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
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तापमान बढ़ने और गर्म हवा चलने से वायरल बुखार लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। सरकारी व निजी अस्पतालों में वायरल बुखार के मामले सामने आ रहे हैं। अब वायरल बुखार के साथ मलेरिया भी जिले में पैर पसारता रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल में जनवरी से मई माह तक 23 केस मलेरिया के मिल चुके हैं। इनमें जनवरी में दो, फरवरी में पांच, मार्च में तीन, अप्रैल में छह और मई में सात केस मिले हैं। इस साल में कोई ऐसा महीना नहीं रहा, जिसमें मलेरिया का केस न मिला हो। अप्रैल और मई में मलेरिया के ज्यादा केस मिले हें। पिछले साल 2021 की स्थिति देखे तो पूरेे साल में कुल 57 केस मलेरिया के मिले थे।
सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. रामनिवास ने बताया कि मलेरिया से बचाव के लिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। फिजिशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि मच्छर के काटने से मलेरिया होता है। अपने घर में या आसपास में मच्छरों को न पनपने दे। इसके साथ ही मच्छर के काटने से बचाव के इंतजाम करने चाहिए।
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मच्छरजनित रोगों की परामर्शदाता राजेश कुमारी ने बताया कि मौसम में बार-बार बदलाव होने के कारण मच्छर भी पैदा हो रहा है। मच्छर के काटने से लोगों को मलेरिया बुखार हो जाता है। इस साल में अब तक 23 केस मलेरिया के सामने आ चुके हैं। मलेरिया वैसे तो जुलाई में शुरू होता है, लेकिन मच्छर होने के कारण मलेरिया के केस सामने आ रहे हैं।
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इस साल में मिले मलेरिया के केस की स्थिति
जनवरी - 02
फरवरी - 05
मार्च - 03
अप्रैल - 06
मई - 07
मलेेरिया बुखार के लक्षण
ठंड के साथ तेज बुखार होना।
सिर दर्द होना, उल्टी होना।
अत्याधिक थकान होना।
कमजोरी महसूस होना।
बचाव :
अपने घर के आसपास साफ-सफाई रखें।
गड्ढे व तालाब में जलभराव न होने दें।
गड्ढों में जलभराव रोकने से मिट्टी का भराव करें।
नाले व नालियों में भरे पानी पर सप्ताह में दो बार कीटनाशक का छिड़काव करें ।
दो बार जला हुआ मोबिल ऑयल डालें।
रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढकने वाले कपड़े पहनें।
चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं।
मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से होता है मलेरिया
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से होता है। समय पर इलाज न मिलने से यह जानलेवा हो सकता है। इसलिए मच्छर के काटने से बचाव करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि मलेरिया से बचाव के लिए एक जून से 30 जून तक मलेरियारोधी माह मनाया जा रहा है। इसके तहत गांवों में बैठकें आयोजित कर ग्रामीणों को मलेरिया से बचाव की जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है। लोगों से अनुरोध है कि मलेरिया की रोकथाम के लिए अपने घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दे और साफ-सफाई रखें।
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